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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:54 · नई दिल्ली संस्करण

17 को मधुपुर उप चुनाव में खिलेगा कमल या चलेगा तीर- धनुष

राष्ट्रीय सागर डेस्क5 मिनट का पठन

परवेज कुरैशी

रांची। 17 अप्रैल को मधुपुर विधानसभा में उपचुनाव के लिए मतदान होना है। यहां सत्ता पक्ष झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व विधायक व मंत्री दिवंगत हाजी हुसैन अंसारी के पुत्र हाफिज उल हसन मैदान में हैं। हफीजुल को विधायक बनने से पहले कला संस्कृति खेलकूद विभाग के मंत्री बनाये गये, फिर उपचुनाव में उम्मीदवार बना कर मैदान में उतारा गया हैं । तो वहीं विपक्ष की ओर से आजसू और भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार गंगा नारायण सिंह टक्कर देने के लिए खड़े हैं। परिणाम किनके पक्ष में आएगा जनता किसे मतदान करेगी ये 17 अप्रैल को पता लगेगा।

लेकिन अभी जो समीकरण बन रहा है इसमें भाजपा और आजसू भले गठबंधन में है लेकिन आजसू के लगभग 45 हजार से अधिक वोट लाने वाले गंगा भाजपा में शामिल होने से आजसू इस चुनाव से दूर नजर आ रहे हैं , तो वहीं पूर्व श्रम मंत्री रहे भाजपा विधायक राज पलिवार को टिकट नहीं मिलने उनके समर्थक नाखुश है, भले राज पलिवार पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ मंच साझा कर लिए हो लेकिन दिल तो कुछ और चाहता जी। अब इस चुनावी सफर में गंगा के लिए भाजपा ही सब कुछ है। इसलिए बाबूलाल मरांडी से लेकर प्रदेश अध्यक्ष सहित बीजेपी के लगभग सभी विधायक और नेता गन उनका कमान संभाले हुए हैं । अब इसमें कितना सफल होंगे कि आने वाला समय बताएगा । लेकिन बेरमो, दुमका उप चुनाव जीतने के बाद महागठबंधन कांग्रेस, राजद और झारखंड मुक्ति मोर्चा का हौसला बुलंद है, हैक्ट्रीक मधुपुर में पूरा करेंगे ऐसा कह रहे है। लेकिन यह उपचुनाव में भाजपा ने पाकिस्तान, घुसपैठिए, बांग्लादेशी, बरह्मणवाद,हिन्दू, मुसलमान और कांग्रेस विधायक इरफान का बाबा धाम में पहले रमजान में शिवलिंग पूजा करना,कोरोना के दूसरे लहर के बीच यह राजनीति से किसे कितना लाभ होगा इसके लिए परिणाम तक इंतजार करना होगा।

पंचायतों को जोन में बांटा ः

इसी रणनीति के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मधुपुर के लगभग 66 पंचायतों को 11 सेक्टर में बांटकर दमखम लगा रहे हैं ।

बूथ कितने हैः

मधुपुर विधानसभा में लगभग 409 बूथ है । अगर 2019 का रिकॉर्ड देखे तो 162 बूथों पर झामुमो को स्पष्ट बढ़त मिली थी । जबकि 2019 में गंगा आजसू के सीट पर चुनाव लड़े थे तो वहीं निर्दलीय इकबाल को 9866 और सहीम खान को 4222 मत प्राप्त हुए थे। हालांकि इस उपचुनाव में दोनों मुस्लिम चुनाव नहीं लड़ रहे हैं , जिसका फायदा सीधे हाफिजुल हसन को जाता है ।

मतदाता संख्या :

लगभग 3 लाख 21हजार मतदाता है। एक लाख 69 पुरुष है , एक लाख 52 महिला है ।

एक लाख लगभग अल्पसंख्यक मुस्लिमों का वोटर है । वही दलित 55 हजार और आदिवासी 40हजार के आसपास हैं। खासकर ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत, यादव को मिलाकर लगभग एक लाख 32 या फिर 50 हजार के आसपास वोटर हैं।

किस प्रखंड में कितना बूथः

मारगोमुंडा में कुल 75 बूथ है , मधुपुर में 59 बूथ पर झामुमो बढ़त लिए थे।

मधुपुर में 159 बूथ, कैरो में 79 बूथ,

देवघर में 33 और देवीपुर में 63 बूथ है ।

2019 में बूथ पर झामुमो की पकड़ः

मारगोमुंडा बूथ में 75 बूथ पर 57 बूथों पर झामुमो लीड की थी और मधुपुर में मधुपुर में ग्रामीण क्षेत्र में 115 बूथ में उन 40 में झामुमो था और मधुपुर नगर में 44 बूथ में 8 बूथ पर आगे था ।

इसी तरह कैरो प्रखंड की बात करें तो वहां 27 बूथ पर आजसू का दबदबा था और 24 बूथ पर झामुमो, देवीघर प्रखंड के बात करें तो 33 बूथ में से 20 बूथ पर झामुमो था , देवीपुर में 21 बूथ पर भाजपा तो 14 बूथ पर झामुमो था बाकी अन्य लोग इस पर थे और जीत हाजी हुसैन अंसारी को मिली थी। हालांकि 2014 के चुनाव में मधुपुर से मोदी लहर में राज परिवार चुनाव लड़े थे और जीत हासिल की थी । रघुवर कैबिनेट में मंत्री बन गए थे। मधुपुर में ज्यादातर झामुमो ही चुनाव जीतते रही है। इसलिए समीकरण तो यही बता रहा है झामुमो का पल्ला भारी है और सरकार भी इनकी है ।

2019 में किसे मिले थे वोटः

अब 2019 में हाजी हुसैन अंसारी को 8811 5 वोट प्राप्त हुए थे। वही राज परिवार को 65046 और आजसू के गंगा नारायण सिंह को 4560 ही वोट मिले थे , जिसमें नोटा को 1.97 प्रतिशत प्रतिशत वोट डाले गये थे।

इस बार क्या:

आजसू छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले गंगा नारायण को आजसू कैडर के लगभग 15 से 20 हजार वोट का नुकसान होता दिख रहा है। वहीं बीजेपी ने राज परिवार को नकार दिया इसलिए राज परिवार का जो अपने वोटर है वे सब गंगा नारायण को मतदान करने से बचेंगे । इस तरह से बीजेपी को नुकसान होता दिख रहा है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ,राजद ,वामदल भी हाफिजुर हसन को सपोर्ट कर रहे हैं।

हफीजुल बाबूलाल का तोड़ेंगे रिकॉर्ड ः

हफीजुल अंसारी झारखंड के बिना चुनाव जीते मंत्री बनने वाले पांचवें व्यक्ति हैं। वही झारखंड का यह रिकॉर्ड रहा है कि जो मंत्री बनकर चुनाव लड़े हैं , वह सभी हारे हैं । इसका भी यह रिकॉर्ड तोड़ देंगे , क्योंकि सर्वप्रथम बाबूलाल मरांडी मुख्यमंत्री थे , तो उन्होंने रामगढ़ से उप चुनाव लड़कर विधायक बने थे। जिनका रिकॉर्ड अब हाफिज उल हसन तोड़ सकते हैं।

बाबू लाल और दीपक प्रकाश ः

दुमका, बेरमो दोनों विधानसभा उपचुनाव में भाजपा विधायक लल के नेता बाबूलाल मरांडी और प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश की मौजूदगी में चुनाव हार चुके है , जबकि दुमका आदिवासी बहुल क्षेत्र था , लेकिन बाबूलाल सफल नहीं हुए । वहीं बेरमो जेनरल सीट भाजपा के खाते में लाने में प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश असफल रहें। अब मधुपुर उपचुनाव में बाबूलाल और दीपक प्रकाश की साख दांव पर है,जबकि दीपक ने मधुपुर की जनता से यहा तक कह डाले हैं कि उन्होंने ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वादा करके आये हैं कि ये सीट जीतस्वरुप तोहफा में देंगे। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सावधान ये भाजपा वाले झूटे सपने और पैसै से वोट खरीदने आयेंगे।

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