मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:56 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंड में लंबित नियुक्तियों पर हाईकोर्ट सख्त, महाधिवक्ता बोले—चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
झारखंड में लंबित नियुक्तियों पर हाईकोर्ट सख्त, महाधिवक्ता बोले—चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग और राज्य सूचना आयोग जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में लंबे समय से लंबित नियुक्तियों को भरने के बारे में राज्य सरकार से 13 अप्रैल तक जानकारी मांगी है।

बुधवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले से जुड़ी जनहित और अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को महत्वपूर्ण जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि पिछली सुनवाई के बाद मुख्यमंत्री आवास पर चयन समिति की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें नियुक्तियों को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए हैं। महाधिवक्ता ने खंडपीठ को आश्वस्त किया कि नियुक्तियों की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने अदालत को यह भी सूचित किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फिलहाल असम चुनाव के सिलसिले में राज्य से बाहर हैं। जैसे ही मुख्यमंत्री लौटेंगे, बैठक में लिए गए निर्णयों और नियुक्ति की प्रगति से अदालत को औपचारिक रूप से अवगत करा दिया जाएगा।

दूसरी ओर, प्रार्थी राजकुमार की ओर से वरीय अधिवक्ता वीपी सिंह ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि ये पद वर्षों से रिक्त हैं, जिससे राज्य की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

उल्लेखनीय है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की मांग को लेकर पहली जनहित याचिका वर्ष 2020 में दाखिल की गई थी। पिछले छह वर्षों में कई बार सुनवाई होने के बावजूद अब तक इन पदों को नहीं भरा जा सका है, जिसे लेकर पूर्व की सुनवाइयों में भी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर तल्ख टिप्पणियां की थीं।

महाधिवक्ता के आश्वासनों को रिकॉर्ड पर लेते हुए खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है। यह मामला अधिवक्ता राजकुमार और एडवोकेट एसोसिएशन की ओर से दायर याचिकाओं पर आधारित है, जिसमें लोकायुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त जैसे शीर्ष पदों को जल्द भरने की गुहार लगाई गई है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें