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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:39 · नई दिल्ली संस्करण

कोयला मजदूरों की सुरक्षा पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, मुख्य कारखाना निरीक्षक तलब

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कोयला मजदूरों की सुरक्षा पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, मुख्य कारखाना निरीक्षक तलब

रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और उनके अधिकारों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य के 'मुख्य कारखाना निरीक्षक' को अगली सुनवाई में सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल के वर्षों में खदान मजदूरों की सुरक्षा और उनके जीवन के अधिकार को लेकर अत्यंत सख्त निर्देश जारी किए थे। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि खदानों में काम करने वालों का जीवन और स्वास्थ्य सर्वोपरि है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसी कड़ी में सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों के हाई कोर्ट को इस मामले की निगरानी करने का आदेश दिया था, जिसके तहत झारखंड हाई कोर्ट ने यह सुनवाई शुरू की है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रमुख कोयला खदानों और कारखानों के निरीक्षण एवं सुरक्षा मानकों की समीक्षा रिपोर्ट अदालत में पेश की गई।

हालांकि, खंडपीठ ने इस रिपोर्ट पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। अदालत का मानना है कि धरातल पर मजदूरों की स्थिति और सुरक्षा मानकों के पालन में अभी भी भारी कमी है।

कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि मजदूरों को खतरनाक काम के दौरान सुरक्षा देने और उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि खदानों में सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन हो, मजदूरों को इलाज की अच्छी सुविधाएं मिलें और अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। कोर्ट ने कहा कि ठेका मजदूरों को पक्का करने (नियमितीकरण), उन्हें तय न्यूनतम मजदूरी देने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में क्या प्रगति हुई है, इसकी भी पूरी जानकारी दी जाए।

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य कारखाना निरीक्षक को अगली तिथि पर अदालत में उपस्थित होकर यह बताने को कहा है कि अब तक इन दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

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