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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:07 · नई दिल्ली संस्करण

ओपन जेल की व्यवस्था की मॉनिटरिंग पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, तीन सदस्यीय कमेटी बनाने का निर्देश

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ओपन जेल की व्यवस्था की मॉनिटरिंग पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, तीन सदस्यीय कमेटी बनाने का निर्देश

रांची। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राज्य के ओपन जेल में सुविधाओं की उपलब्धता और उनकी मॉनिटरिंग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए अहम निर्देश जारी किए हैं।

सोमवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। खंडपीठ ने राज्य सरकार को गृह सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्देश दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस कमेटी में आईजी प्रिजन और संबंधित ओपन जेल के जेल सुपरिटेंडेंट को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि ओपन जेलों की व्यवस्था की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक कमेटी गठन से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए।

मामले की अगली सुनवाई 11 जून को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता पीयूष चित्रेश ने पक्ष रखा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों को ओपन जेलों की स्थिति सुधारने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के लिए गृह विभाग के तहत एक कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है।

इस कमेटी का उद्देश्य ओपन जेलों में कैदियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनके पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाना है।

शीर्ष अदालत के निर्देशों के तहत गठित कमेटी को ओपन जेलों में जिम, चिकित्सा सुविधा, भोजन की गुणवत्ता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा कर उन्हें बेहतर बनाने के लिए काम करना है।

साथ ही कैदियों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके सामाजिक पुनर्वास को मजबूत करने की दिशा में भी पहल करने का निर्देश दिया गया है। इसी क्रम में झारखंड हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया और राज्य सरकार को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है।

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