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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:38 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंड: 2018 से अब तक न्यायिक और पुलिस हिरासत में 437 मौतें, हाईकोर्ट ने जताई चिंता

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
झारखंड: 2018 से अब तक न्यायिक और पुलिस हिरासत में 437 मौतें, हाईकोर्ट ने जताई चिंता

रांची। झारखंड में हिरासत में हुई मौतों के मामलों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने एक बार फिर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से दाखिल शपथपत्र का संज्ञान लिया, जिसमें वर्ष 2018 से अब तक की हिरासत मौतों का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया है।

गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दांडेल की ओर से दाखिल शपथपत्र के अनुसार, वर्ष 2018 से अब तक राज्य की जेलों में और पुलिस हिरासत में कुल 437 मौतें हुई हैं। शपथपत्र में यह भी बताया गया कि जेल में हुई मौतों में से केवल 202 मामलों में न्यायिक जांच कराई जा सकी है।

वहीं, पुलिस हिरासत में हुई 39 मौतों में से 11 मामलों में अब तक जांच नहीं हो पाई है।

अदालत ने कहा कि पुलिस या न्यायिक हिरासत में मृत्यु, लापता होने या दुष्कर्म के हर मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा न्यायिक जांच अनिवार्य है। ऐसे में जिन मामलों में अब तक जांच नहीं कराई गई है, वह चिंता का विषय है।

खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से इस संबंध में सुझाव मांगा है और पूछा है कि वे आगे क्या राहत चाहते हैं तथा याचिका में उनकी मांग क्या है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व फरवरी में हुई सुनवाई के दौरान भी हाईकोर्ट ने इसी मुद्दे पर राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी थी।

उस समय दायर शपथपत्र में वर्ष 2018 से 2025 के बीच 437 हिरासत मौतों का उल्लेख किया गया था, लेकिन अधिकांश मामलों में यह स्पष्ट नहीं था कि अनिवार्य न्यायिक जांच कराई गई या नहीं।

अदालत ने तब भी कहा था कि हिरासत में मौत के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र न्यायिक जांच अनिवार्य है।

साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया था कि वह शपथपत्र के माध्यम से यह स्पष्ट करे कि इन मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जांच कराई गई या नहीं और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन हुआ या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

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