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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:49 · नई दिल्ली संस्करण

झारखंड विधानसभा में छात्रों के ड्रॉपआउट पर हुई चर्चा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
झारखंड विधानसभा में छात्रों के ड्रॉपआउट पर हुई चर्चा

रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायक हेमलाल मुर्मू ने छात्रों के ड्रॉपआउट का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में नामांकन की संख्या बढ़ रही है, लेकिन 12वीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते छात्रों के ड्रॉपआउट की संख्या भी बढ़ जाती है, जो चिंता का विषय है।इस पर जवाब देते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार का उत्तर स्पष्ट और तथ्यात्मक है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार 2.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ड्रॉपआउट का प्रतिशत 3.4 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) और ड्रॉपआउट दर अलग-अलग अवधारणाएं हैं। सकल नामांकन अनुपात कुल छात्रों के आधार पर निकाला जाता है, जबकि ड्रॉपआउट दर का आकलन कुल स्कूली छात्रों की संख्या के आधार पर किया जाता है।पूरक प्रश्न करते हुए विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि संथाल परगना क्षेत्र में गरीब आदिवासी परिवार अपने बच्चों को मिशन स्कूलों में फीस देकर पढ़ाते हैं। ऐसे छात्रों को भी सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाएं-जैसे मध्याह्न भोजन और साइकिल दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी विद्यालयों के भरोसे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर नहीं सुधारा जा सकता, इसलिए निजी विद्यालयों के छात्रों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से 12 तक नामांकित छात्रों को निशुल्क किताबें, ड्रेस और साइकिल उपलब्ध कराई जाती हैं। अल्पसंख्यक एवं निजी विद्यालयों के छात्रों को भी कुछ सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन वे सरकारी विद्यालयों जैसी व्यापक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह नीतिगत विषय है और सरकार इस पर विचार करेगी। निर्णय होने के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे।-

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