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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:23 · नई दिल्ली संस्करण

गुमला की लापता बच्ची मामले में हाई कोर्ट सख्त, दो हफ्ते में प्रगति नहीं हुई तो सीबीआई जांच संभव

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
गुमला की लापता बच्ची मामले में हाई कोर्ट सख्त, दो हफ्ते में प्रगति नहीं हुई तो सीबीआई जांच संभव

रांची। झारखंड के गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई छह वर्षीय बच्ची के मामले में सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि इस दौरान अनुसंधान में कोई ठोस और संतोषजनक प्रगति नहीं हुई, तो मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने पर विचार किया जाएगा।सुनवाई के दौरान झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुईं और मामले की वर्तमान जांच स्थिति की जानकारी दीं। अदालत ने उनसे पूछा कि सात वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस बच्ची का पता क्यों नहीं लगा सकी। न्यायालय ने यह भी जानना चाहा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है।वहीं, गुमला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से भी अदालत ने जांच की प्रगति पर सवाल किए। प्रस्तुत रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर अदालत ने टिप्पणी की कि मामले में अब तक कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। इस पर अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर विस्तृत और संतोषजनक जवाब दाखिल करे।दरअसल, यह मामला गुमला की रहने वाली चंद्रमुनि उराइन द्वारा अपनी लापता बेटी की बरामदगी के लिए दायर हेबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ कर रही है।पूर्व में अदालत को बताया गया था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी ने दिल्ली समेत कई स्थानों पर जाकर बच्ची की तलाश की, साथ ही उसकी तस्वीरें विभिन्न प्लेटफॉर्म पर साझा करवाईं। इसके बावजूद बच्ची का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।हालांकि, वर्ष 2023 में गठित एसआईटी की कार्रवाई के दौरान छापेमारी में नौ लापता बच्चों को बरामद किया गया था, जो इस जांच की एक सकारात्मक उपलब्धि मानी गई। फिर भी, संबंधित बच्ची की तलाश अब तक जारी है।बहरहाल, अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि अगले दो सप्ताह में जांच में ठोस प्रगति नहीं दिखी, तो मामले को सीबीआई को सौंपा जा सकता है, जिससे जांच को नई दिशा मिल सके।

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