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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:54 · नई दिल्ली संस्करण

भारतीय समाज लिव इन रिलेशनशिप को नहीं देता मान्यता : हाईकोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन

भारतीय समाज लिव इन रिलेशनशिप को नहीं देता मान्यता : हाईकोर्टप्रयागराज, 24 फरवरी । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि लिव इन रिलेशनशिप टूटने के बाद महिला का समाज में अकेले रहना कठिन है। भारतीय समाज लिव इन को मान्यता नहीं देता। लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला के पास एफआईआर दर्ज कराने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचता। फिलहाल कोर्ट ने आरोपित की जमानत मंजूर कर ली है।यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने दिया है। पीड़िता शादीशुदा हैं। उसके दो बच्चे हैं। वह याची के संपर्क में आई और लिव इन में रहने लगी। जब गर्भवती हो गई तो उसने शादी करने का दबाव बनाया. जिस पर आरोपित के इनकार करने पर उसने दुष्कर्म व न्यास भंग के आरोप में शिकायत दर्ज कराई। याची ने पीड़िता का आपत्तिजनक वीडियो उसके पूर्व पति को भेज दिया। इसके कारण उसने साथ रहने से इनकार कर दिया। आरोपित का कहना था कि पीड़िता बालिग है। लिव इन की सहमति थी। उसने शादी का वायदा कर लिव इन रिलेशनशिप नहीं बनाई। वह फर्जी अपराध के केस में नवम्बर 22 से जेल में बंद है। जमानत पर रिहा किया जाए। जिस पर कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली है।

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