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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:57 · नई दिल्ली संस्करण

छह साल बाद लिपूलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार बहाल, भारतीय व्यापारियों का पहला दल तकलाकोट पहुंचा

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन
छह साल बाद लिपूलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार बहाल, भारतीय व्यापारियों का पहला दल तकलाकोट पहुंचा

पिथौरागढ़/धारचूला। कोविड-19 महामारी के कारण करीब छह वर्षों से बंद भारत-चीन सीमा व्यापार शनिवार को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले स्थित ऐतिहासिक लिपूलेख दर्रे के रास्ते फिर शुरू हो गया। वर्ष 2026 के सीमा व्यापार के शुभारंभ के साथ भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत के तकलाकोट पहुंच गया, जहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद व्यापारिक गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं।

भारत-तिब्बत व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रौकली के नेतृत्व में 16 पंजीकृत व्यापारी और चार हेल्पर सहित कुल 20 सदस्य सभी निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी कर लिपूलेख दर्रे के रास्ते चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में प्रवेश कर तकलाकोट मंडी पहुंचे।

उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी के अनुसार, 31 जुलाई की शाम व्यापारिक दल ने गुंजी स्थित इमीग्रेशन कार्यालय में सभी औपचारिकताएं पूरी कीं और नाबीढांग में रात्रि विश्राम किया। शनिवार सुबह लगभग 10:15 बजे चीन के अधिकारियों द्वारा आवश्यक जांच और अनुमति मिलने के बाद दल ने सीमा पार की और तकलाकोट पहुंचकर व्यापारिक गतिविधियों का शुभारंभ किया।

उन्होंने बताया कि चीन प्रशासन के निर्देशानुसार फिलहाल केवल उन्हीं व्यापारियों को प्रवेश दिया गया है, जो पूर्व से पंजीकृत हैं और पहले भी सीमा व्यापार कर चुके हैं। इसी वजह से पहला दल भारत से कोई नई व्यापारिक सामग्री लेकर नहीं गया। व्यापारी तकलाकोट में पहले से उपलब्ध अपने सामान और आवश्यक औपचारिकताओं के आधार पर व्यापार का संचालन करेंगे।

प्रशासन के मुताबिक, आगामी व्यापारिक दलों की तिथियों को लेकर चीन प्रशासन के साथ लगातार ई-मेल के माध्यम से समन्वय किया जा रहा है। जैसे ही अगले चरण की अनुमति मिलेगी, अन्य पंजीकृत व्यापारियों को भी चरणबद्ध तरीके से तकलाकोट भेजा जाएगा।

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