देसंविवि में पुस्तकालय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
देसंविवि में पुस्तकालय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
हरिद्वार, 15 मार्च । देव संस्कृति विश्वविद्यालय में केन्द्रीय पुस्तकालय द्वारा पुस्तकालय प्रणाली पर सूचना संचार तकनीकी का प्रभाव विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आज शुभारंभ हुआ।
इस संगोष्ठी का डॉ. एचजी होसामणी साइंटिस्ट-ई (इंफ्लीबनेट यूजीसी) और कुलसचिव बलदाऊ देवांगन, एकेडमिक अध्यक्ष डॉ. ईश्वर भारद्वाज, छात्र कल्याण विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया।
मुख्य अतिथि में डॉ. एचजी होसामणि ने कहा कि सूचना संचार तकनीकी पर आधारित पुस्तकालयों की यह यात्रा सन् 1990 से शुरू हुई है, जब इंटरनेट बाजार में आया था। उन्होंने कहा कि शोध गंगा, शोध गंगोत्री को इस तरह से व्यवस्थित किया गया है कि जहां पर रिसर्च की सिनॉप्सिस से लेकर सब कुछ उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि संस्कृति का डाटा भी बनायेंगे और ऑनलाइन साझा करेंगे।
देसंविवि के छात्र कल्याण विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप कुमार ने कहा कि समय के साथ चलने वाली मांग को लेकर आईसीटी और लाइब्रेरी एक साथ बेहतर कदम है। ज्ञान की संपदा हमेशा हमारे पास रही है, जो हमें अंदर की जानकारी की और ले जाती है। हमारा लक्ष्य केवल एक ही होना चाहिए, जिसमें हमें गुरुदेव कि योजना मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण के साथ चलना है।
इससे पूर्व देसंविवि के पुस्तकालाध्यक्ष डॉ. कल्पना गायकवाड़ ने कहा कि डॉ. प्रणव पण्ड्या के मार्गदर्शन से यह पुस्तकालय अपने उच्च शिखर तक पहुंच रहा हैं। उन्होंने इस पुस्तकालय की शुरुआत 2001 में लगभग दो हजार पुस्तकों से हुई थी। वर्तमान में 46000 पुस्तकें, प्रिंट जर्नल्स, मैगजीन, न्यूजपेपर बाउंड वॉल्यूम लगभग 1500 एवं 25000़ ई-रिसोर्सेस उपलब्ध है। साथ ही उन्होंने बताया कि पुस्तकालय के कंप्यूटराइजेशन की प्रक्रिया सन् 2003 में शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में रिसोर्स शेयरिंग, बायोमेट्रिक आदि सुविधाएं उपलब्ध है। गुरुदेव द्वारा रचित 3200 पुस्तकें डिजिटलाइज की जा चुकी हैं।
देसंविवि के कुलसचिव बलदाऊ देवांगन ने उपस्थित सभी अतिथिजनों, प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापन किया। इस संगोष्ठी में कुल 112 प्रतिभागियों भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर देसंविवि के प्रोफेसर तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।





