अब इलाज के लिए गहने गिरवी रखने की जरूरत नहीं, JP Nadda ने बताया सरकार का प्लान
HealthWealth Summit में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि अब गरीबों को इलाज के लिए मकान-जमीन बेचने की मजबूरी नहीं है। सरकार इलाज के साथ बीमारी की रोकथाम और समय पर पहचान पर जोर दे रही है। उन्होंने बताया कि देश में 1.86 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर बने हैं और आयुष्मान भारत के तहत 63 करोड़ लोगों को 5 लाख तक मुफ्त इलाज मिल रहा है। अब तक 10 करोड़ एडमिशन और 1.4 लाख करोड़ का खर्च हो चुका है। मेडिकल कॉलेज और नए AIIMS से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर होगी।

नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा है कि अब देश में गरीबों को डॉक्टर के पास जाने के लिए अपना मकान-जमीन बेचने की मजबूरी नहीं है। सरकार सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि बीमारी की समय रहते पहचान पर भी जोर दे रही है। गुरुवार को इंडिया टुडे के पहले HealthWealth Summit का उद्घाटन करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब देश की आबादी स्वस्थ होगी। नड्डा ने कहा, "पहले स्वास्थ्य व्यवस्था का फोकस सिर्फ बीमार होने के बाद इलाज पर था, लेकिन अब हमने इसे व्यापक नजरिए से देखा है। बीमारी से बचाव, समय पर जांच और गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।"
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के बाद से स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा समावेशी बनाया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी को भी इलाज से वंचित न रहना पड़े। नड्डा ने बताया कि देशभर में 1.86 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं। ये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में काम कर रहे हैं जहां गांव स्तर पर ही जांच और इलाज की सुविधा मिल रही है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ कवरेज योजना है। इसके तहत 63 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। इसमें रिक्शा चालक, सब्जी विक्रेता, ऑटो ड्राइवर, होटल वर्कर जैसे असंगठित क्षेत्र के लोग शामिल हैं।
अब तक 10 करोड़ अस्पताल में भर्ती के मामले हो चुके हैं और 1.4 लाख करोड़ रुपये गरीबों के इलाज पर खर्च किए जा चुके हैं। नड्डा ने कहा, "पहले गरीबों को इलाज के लिए जमीन, गहने गिरवी रखने पड़ते थे, लेकिन अब ऐसी नौबत नहीं आती। यह सही मायने में गरीबों की जय है।" स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हर नए मेडिकल कॉलेज के साथ MBBS, नर्सिंग और PG सीटें बढ़ रही हैं, जिससे भविष्य में स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होंगे। देश में कई नए एम्स खोले गए हैं और वहां बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं।
उन्होंने माना कि बच्चों की कॉक्लियर इम्प्लांट जैसी जटिल सर्जरी के लिए अभी भी एम्स दिल्ली में लंबा इंतजार करना पड़ता है। सभी नए एम्स को दिल्ली एम्स जैसा बनने में समय लगेगा, लेकिन सरकार विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार तेजी से कर रही है। आयुष्मान भारत से जुड़ी शिकायतों पर नड्डा ने कहा कि राज्यों और जिलों में कमेटियां बनाई गई हैं। निजी अस्पतालों द्वारा कम भुगतान का हवाला देकर इलाज से मना करने जैसी शिकायतों का जिला स्तर पर समाधान किया जाएगा और अधिकतम एक महीने में जवाब देने की व्यवस्था है।
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