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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:20 · नई दिल्ली संस्करण

गुरुग्राम समेत औद्योगिक शहरों में बढ़ सकती है पश्चिम एशिया तनाव से उत्पादन लागत : दीपक मैनी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
गुरुग्राम समेत औद्योगिक शहरों में बढ़ सकती है पश्चिम एशिया तनाव से उत्पादन लागत : दीपक मैनी

इस तनाव के कारण तेल-गैस संकट से महंगाई, उद्योगों पर बढ़ेगा दबावऑटो, टेक्सटाइल और केमिकल उद्योग प्रभावित होने की आशंकागुरुग्राम। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत पर भी इसके व्यापक प्रभाव दिखाई दे सकते हैं। यदि यह तनाव और बढ़ता है तो भारत में महंगाई, उद्योगों की लागत और आम लोगों के जीवन पर सीधा असर पड़ सकता है। यह कहना है प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (पीएफटीआई) के चेयरमैन दीपक मैनी का। उन्हाेंने शनिवार को कहा कि गुरुग्राम जैसे बड़े औद्योगिक और कॉर्पोरेट हब पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। यहां बड़ी संख्या में ऑटोमोबाइल, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां काम करती हैं। ईंधन, एलपीजी और पीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी से इन कंपनियों की संचालन लागत बढ़ेगी, जिसका असर उत्पादन, निवेश और रोजगार पर पड़ सकता है। दीपक मैनी ने कहा कि ऐसे वैश्विक संकट के समय सरकार और उद्योग जगत को मिलकर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले संभावित झटकों को कम किया जा सके।दीपक मैनी के अनुसार भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में यदि कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि भारत का ईरान, इराक, इजराइल, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देशों के साथ लगभग तीन लाख 55 हजार करोड़ रुपये का व्यापार है। यदि क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है तो निर्यात और आयात दोनों प्रभावित हो सकते हैं, जिससे कई भारतीय उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।दीपक मैनी ने बताया कि तेल और एलपीजी की आपूर्ति में कमी आने के साथ साथ पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है। देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में पीएनजी का इस्तेमाल नियमित उत्पादन प्रक्रियाओं में किया जाता है। यदि पीएनजी की आपूर्ति कम होती है तो ऐसी इंडस्ट्रीज को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि उनकी उत्पादन प्रक्रिया लगातार गैस पर निर्भर रहती है। इससे उत्पादन धीमा पड़ सकता है और लागत भी बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि एलपीजी की कमी का सीधा असर आम लोगों के घरों तक पहुंचेगा। घरेलू गैस सिलेंडर महंगे हो सकते हैं और आपूर्ति में देरी भी हो सकती है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ेगा।

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