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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:52 · नई दिल्ली संस्करण

विधानसभा में गुजरात सार्वजनिक परीक्षा विधेयक पेश

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

विधानसभा में गुजरात सार्वजनिक परीक्षा विधेयक पेश

- पेपरलीक मामले के आरोपितों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान

- नकल रोधी बिल के लिए विधानसभा अध्यक्ष ने की राज्य सरकार की सराहना

अहमदबाद/गांधीनगर, 23 फरवरी। गुजरात विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के बाद गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने सदन में गुजरात जाहेर (सार्वजनिक) परीक्षा विधेयक पेश किया। गृह राज्य मंत्री ने बिल पेश करते हुए कहा कि युवा शक्ति देव होती है।

गुरुवार को गुजरात विधानसभा का बजट सत्र शुरू हुआ। राज्यपाल के अभिभाषण के बाद राज्य का बहुचर्चित गुजरात जाहेर (सार्वजनिक) परीक्षा विधेयक गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने पेश किया। बिल पेश होने के साथ विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने बिल के संबंध में सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहल कर बिल बनाया है। किसी प्रकार की त्रुटि हो तो अरोप-प्रत्यारोप के बजाए सुझाव दें। अध्यक्ष ने राज्य सरकार से विनती के शब्दों में कहा कि विपक्ष से यदि सुझाव आए तो इसे नहीं लेना है, ऐसा नहीं कर स्वीकृति की भावना रखें। कानून आम जनता के हित के लिया बनाया गया है।

सदन में बिल पेश करते हुए संघवी ने कहा कि अधिक बोलने के बजाए ज्यादा सुनने की तैयारी के साथ वे सदन पहुंचे हैं। संघवी ने कहा कि सख्त कानून लाना आज समय की मांग है। समय-समय पर परीक्षा में बदलाव जरूरी है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के कानून का भी अध्ययन किया गया है। परीक्षार्थियों के साथ अन्याय या अतिशयोक्ति नहीं हो, यह भी देखा गया है। भर्ती परीक्षा में पेपर लीक होने और गड़बड़ी होने पर लाखों नवयुवक निराश होते हैं। उनके माता-पिता भी निराश होते हैं। उनका स्वप्न होता है कि उनके लड़कों को बड़े होने पर सरकारी नौकरी मिले। असामाजिक तत्व विकास विरोधी काम करते हैं। आसुरी प्रवृत्ति के कारण लोगों की भावनाओं को आहत करते हैं। ऐसा कर वे पेपर लीक नहीं करते हैं, बल्कि अनीति का कार्य करते हैं। शॉर्टकट के जरिए नौकरी पाने का यह रास्ता गलत है।

संघवी ने कहा कि पेपर लीक मामले में पुलिस ने रात-दिन एक कर आरोपितों को पकड़ा है। इनके विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। इससे पूर्व परीक्षाओं के संबंध में कोई ठोस कानून नहीं होने से आरोपितों को बच जाने का फायदा मिल जाता था। इस संबंध में सख्त कानून बना कर इसे लागू करने की जिम्मेदारी हमारी है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में किसी परीक्षार्थी ने शिकायत नहीं की है। गुजरात पुलिस को सूचना दी गई थी कि परीक्षा को लेकर किसी प्रकार की गड़बड़ी पर नजर रखी जाए। संघवी ने कहा कि पहली ही कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री ने परीक्षा दोबारा लेने का निर्णय किया और इसी समय बोर्ड और अध्यक्ष ने तैयारी शुरू कर दी। वडोदरा में तीन दिन पहले से आरोपितों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। पुलिस को पहले से पता चल गया था कि पेपर लीक करने की योजना है। पेपर लीक करने वाला आरोपित हरियाणा का पेपर लेने गया था, वहां गुजरात का पेपर हाथ आ गया था। आरोपित को गुजरात में कोई नहीं मिला इससे उसने दूसरे कोचिंग क्लास में पेपर दिया और उसका ट्रांसलेशन कर वडोदरा भेजना तय किया।

उल्लेखनीय है कि इस बिल में कदाचार करने वाले परीक्षार्थियों और संलिप्त सरकारी कर्मचारियों के लिए तीन साल की सजा और एक लाख रुपये के दंड का प्रावधान किया गया है। भर्ती बोर्ड के जिम्मेदार व्यक्ति की मामले में संलिप्तता पाए जाने पर 5-10 साल की सजा और 10 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये का जुर्माने की सजा का प्रावधान है। परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक के जरिए कदाचार करने वाले विद्यार्थी को 2 साल के लिए परीक्षा से अलग रखा जाएगा। बिल में 23 प्रकार के प्रावधानों के साथ आरोपितों पर शिकंजा कसने की तैयारी की गई है।

राष्ट्रीय सागर

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