गाजियाबाद में पुलिस चौकी में धमाका, टूटीं खिड़कियां, 'तहरीक-उल-मुजाहिदीन' ने ली जिम्मेदारी...
गाजियाबाद की वसुंधरा पुलिस चौकी में शुक्रवार देर रात जोरदार धमाका हुआ, जिसमें खिड़कियां टूटीं और एसी क्षतिग्रस्त हुआ। घटना में 20 वर्षीय डिलीवरी बॉय विशाल घायल हुआ, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। बाद में 'गाजी-2' एक्स अकाउंट से 'तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान' ने जिम्मेदारी का दावा किया। पुलिस ने दावे की पुष्टि नहीं की है। एटीएस, फॉरेंसिक और बम निरोधक दस्ता जांच कर रहे हैं।

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में शुक्रवार देर रात वसुंधरा पुलिस चौकी में हुए जोरदार धमाके ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में स्थित इस चौकी के अंदर रात करीब 9 से 10 बजे के बीच अचानक विस्फोट हुआ, जिसकी आवाज दूर तक सुनाई दी। धमाका इतना तेज था कि चौकी की खिड़कियों के शीशे टूटकर बिखर गए, दीवार में दरार आ गई और वहां लगा एयर कंडीशनर भी क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। पुलिस ने तुरंत इलाके को घेर लिया और जांच शुरू कर दी।
इस धमाके में एक युवक घायल हो गया, जिसकी पहचान गाजियाबाद के अर्थला निवासी 20 वर्षीय विशाल के रूप में हुई है। वह फूड डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करता है और धमाके के समय चौकी में कुछ सामान देने आया था। अधिकारियों के अनुसार, कांच के टुकड़े लगने से वह घायल हुआ। उसे तुरंत दिल्ली के सूर्य नगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। राहत की बात यह रही कि जिस कमरे में धमाका हुआ, उस समय वहां कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था, वरना नुकसान और बड़ा हो सकता था। इंदिरापुरम के एसीपी सूर्यबली मौर्य ने बताया कि घटना के समय चौकी पर एक सब-इंस्पेक्टर और डिलीवरी बॉय मौजूद थे।
धमाके के कुछ घंटे बाद ही मामला और गंभीर हो गया, जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई। 'गाजी-2' नाम के एक एक्स अकाउंट से किए गए पोस्ट और वीडियो संदेश में दावा किया गया कि इस धमाके की जिम्मेदारी 'तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान' ने ली है। वीडियो में कहा गया कि भगवा हुकूमत के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस को निशाना बनाया गया है। इसमें अपने घर, मस्जिद, दीन और संस्कृति की रक्षा के लिए लड़ने का हक होने की बात भी कही गई। पोस्ट में मौजूदा व्यवस्था को नाजायज बताते हुए आगे भी इस तरह की कार्रवाई जारी रखने की धमकी दी गई।
हालांकि, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अभी इस दावे की पुष्टि नहीं की है। गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट की प्रामाणिकता की गहनता से जांच की जा रही है। साइबर सेल यह पता लगा रही है कि यह अकाउंट किसने बनाया, पोस्ट कहां से की गई और इसका डिजिटल ट्रेल क्या है। अधिकारियों का मानना है कि यह किसी शरारती तत्व द्वारा दहशत फैलाने के लिए किया गया फर्जी दावा भी हो सकता है। इसलिए किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले फॉरेंसिक और तकनीकी सबूतों का इंतजार किया जा रहा है।
धमाके की वजह को लेकर भी अभी स्थिति साफ नहीं है। शुरुआत में एसी के कंप्रेसर फटने, सिलेंडर या एसी गैस रिसाव और जब्त पटाखों में विस्फोट जैसी आशंकाएं जताई गईं। लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि अब तक की जांच में एसी फटने से धमाका हुआ नहीं लग रहा है। पुलिस ने पटाखों में विस्फोट की बात से भी इनकार किया है। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों को जांच के लिए आगरा भेजा गया है। पुलिस यह पता लगा रही है कि यह क्रूड बम था, कोई तकनीकी खराबी थी या फिर सोची-समझी साजिश।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए गाजियाबाद पुलिस के साथ-साथ यूपी एटीएस, फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला और बम निरोधक दस्ते की टीमें मौके पर पहुंचीं। एडिशनल सीपी राज करण नायर, इंदिरापुरम के एसीपी सूर्यबली मौर्य और फॉरेंसिक टीम ने मौके का जायजा लिया। जांच टीमें चौकी के अंदर और पीछे कबाड़ गाड़ियों की पार्किंग वाली जगह का बारीकी से निरीक्षण कर रही हैं, क्योंकि कुछ रिपोर्ट्स में धमाका चौकी के पीछे होने की बात भी कही गई है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस चौकी जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जगह के अंदर धमाका होना चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों में डर का माहौल है, वहीं पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट और साइबर जांच के बाद ही यह साफ होगा कि धमाका हादसा था या आतंकी साजिश, और सोशल मीडिया पर किया गया जिम्मेदारी का दावा सच है या महज दहशत फैलाने की कोशिश।
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