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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:55 · नई दिल्ली संस्करण

पाबौ में फ्लोरीकल्चर को मिली नयी उड़ान

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पाबौ में फ्लोरीकल्चर को मिली नयी उड़ान

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की किसान-हितैषी एवं सहकारिता आधारित नीतियां अब केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उनका प्रत्यक्ष प्रभाव भी दिखने लगा है। जनपद पौड़ी गढ़वाल के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र के विकासखंड पाबौ में ढिकवाली की साधन सहकारी समिति ने इस वर्ष पहली बार संयुक्त सहकारी खेती के तहत फ्लोरीकल्चर की शुरुआत की है।अक्टूबर माह से प्रारंभ हुई इस अभिनव पहल में किसानों की सामूहिक भागीदारी ने खेती को परंपरागत ढर्रे से निकालकर आयवर्धक और व्यावसायिक संभावनाओं की ओर मोड़ा है। परियोजना के अंतर्गत अब तक गुलदावरी के 1190 बंच एवं ग्लेडियस के 2630 बंच की कटिंग कर दिल्ली और देहरादून की मंडियों में विपणन किया गया, जिससे समिति को 3.52 लाख की आय प्राप्त हुई है। वर्तमान में भी फूलों की कटिंग एवं विक्रय का कार्य निरंतर जारी है। इस संयुक्त सहकारी खेती से 41 किसान जुड़े हैं, जो 183 नाली भूमि में फ्लोरीकल्चर कर रहे हैं। प्रथम चरण में 50 नाली भूमि पर गुलदावरी एवं ग्लेडियस की खेती की गई, जिसने परियोजना की मजबूत नींव रखी है। किसानों का उत्साह और बाजार से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया इस प्रयास को और सशक्त बना रहा है।परियोजना को गति देने के लिए सहकारिता विभाग की संचालित राज्य समिति सहकारी विकास परियोजना के अंतर्गत 7.57 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की गयी। आगामी चरण में फरवरी 2026 से 150 नाली भूमि में ग्लेडियस, सूरजमुखी एवं गुलदावरी के प्लांटेशन की योजना प्रस्तावित है, जिसकी तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं।जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बुधवार काे इस पहल की सराहना करते हुए बताया कि जब किसानों को सहकारिता के माध्यम से सरकारी सहयोग, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ा जाता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय बदलाव संभव है। उन्होंने कहा कि सहकारिता, नवाचार और सरकारी सहयोग के समन्वय से पर्वतीय क्षेत्रों में भी खेती को लाभकारी बनाकर ग्रामीण आजीविका के नए द्वार खोले जा सकते हैं। जिला प्रशासन ऐसे नवाचारों को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा, ताकि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि हो और गांव आत्मनिर्भर बनें।

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