मिश्रित और सघन कृषि से किसान बन रहे हैं आत्मनिर्भर
रांची। झारखंड की राजधानी रांची और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों मिश्रित और सघन कृषि का प्रचलन काफी बढ़ गया है जिससे कृषक आर्थिक रूप से सशक्त बनकर आत्मनिर्भर हो रहे हैं । मिश्रित और सघन कृषि का प्रचलन खासकर सब्जी की खेती, जो कि नगदी फसल है, उसमें काफी हो रहा है। इस पद्धति में एक ही खेत में मांग के अनुसार कई सब्जियों की खेती की जाती हैं। रातू प्रखंड के किसानों के लहराते खेतों में इन दिनों सघन और मिश्रित कृषि का प्रचलन काफी बढ़ गया है। कृषक एक ही खेत में बाजार के अनुसार कई नकदी फसल उपजा रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी काफी बढ़ गई है। रातू प्रखंड के प्रगतिशील किसान कामेश्वर महतो ने रविवार को कहा कि अब कृषि कार्य में काफी परिवर्तन आया है तथा इसके ज़रिए वे आत्मनिर्भरता की ओर कदम आगे बढ़ा रहे हैं। गुडू़ गांव के प्रगतिशील किसान अमर प्रसाद कहते हैं कि अब हम लोग आधुनिक तरीके से एक साथ कई सब्जियों की खेती कर रहे हैं, इससे मुनाफा बढ़ा है, मगर इन दिनों कोरोना संकट के कारण बाजार पर असर पड़ा है। मिश्रित और सघन कृषि का प्रचलन निश्चित रूप से अन्नदाताओं की जेबें भरने का काम कर रहा है और केंद्र सरकार से प्रोत्साहन पाकर खेती किसानी एक बार फिर इन दिनों सबसे पसंदीदा पेशा बनता जा रहा है।





