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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:22 · नई दिल्ली संस्करण

ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का अद्वितीय मेल है सनातन संस्कृति: धामी

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का अद्वितीय मेल है सनातन संस्कृति: धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। सनातन संस्कृति केवल आस्था और विश्वास पर आधारित नहीं है बल्कि ये गहरे वैज्ञानिक दृष्टिकोण, चिंतन और शोध का परिणाम है।मुख्यमंत्री धामी ने शनिवार को देहरादून स्थित ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में एक समाचार पत्र के 8वें ज्योतिष महाकुम्भ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान पंडित पुरुषोत्तम गौड़ को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके साथ अन्य ज्योतिष आचार्यों को भी सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में धामी ने कहा कि यह प्राचीन और दिव्य ज्ञान में छिपे वैज्ञानिक रहस्यों को आम लोगों तक पहुंचाने का अद्भुत प्रयास है। इस पहल से निकलने वाला निष्कर्ष मानव जीवन और सामाजिक समस्याओं के निराकरण के साथ राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए सार्थक मार्गदर्शन प्रदान होगा। उन्होंने कहा कि ज्योतिष भारत का अत्यंत समृद्ध, गूढ़ और वैज्ञानिक शास्त्र है। ऋषि-मुनि केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं थे, वे उच्च कोटि के वैज्ञानिक भी थे। आर्यभट्ट ने खगोल विज्ञान और गणित में क्रांतिकारी सिद्धांत स्थापित किए, महर्षि पराशर ने ज्योतिष शास्त्र को व्यवस्थित और वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया, वराहमिहिर ने खगोल, भृगु मुनि ने भविष्य कथन और कालगणना की परंपरा को समृद्ध किया। आधुनिक विज्ञान जिन खगोलीय घटनाओं को समझने के लिए विशाल यंत्रों का सहारा लेता है, उन्हीं घटनाओं के मूल सिद्धांत हमारे ऋषि-मुनियों ने सहस्रों वर्ष पूर्व ग्रह-नक्षत्रों की गति, समय-चक्र, मानव जीवन और प्रकृति के गहन अध्ययन कर प्राप्त किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र भौतिक जीवन, आध्यात्मिक चेतना और दैविक व्यवस्था, इन तीनों के बीच संतुलन स्थापित करता है। ज्योतिष शास्त्र हमें ये सिखाता है कि मानव जीवन और ब्रह्मांड एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। सूर्य, चंद्रमा और ग्रह केवल आकाशीय पिंड मात्र नहीं हैं बल्कि वे समय-चक्र, प्रकृति के संतुलन और मानव जीवन की प्रवृत्तियों को दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कारक भी हैं। दुनिया भर में ज्योतिष और वास्तु शास्त्र का व्यापक अध्ययन किया जा रहा है। ज्योतिष जैसे पवित्र ज्ञान को पूरी जिम्मेदारी के साथ समाज के सम्मुख रखा जाए, ताकि ये जनकल्याण का माध्यम बने। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति की पताका संपूर्ण विश्व में लहरा रही है और दुनिया भर के देश हमारी प्राचीन संस्कृति, दर्शन, ज्ञान और विज्ञान से परिचित हो रहे हैं।धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार उत्तराखंड को देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक चिकित्सा, योग और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन की स्थापना भी करने जा रहे हैं। हमने राज्य में ज्योतिष विद्या को बढ़ावा देने के लिये उत्तराखंड ज्योतिष परिषद का भी गठन किया है। इससे हमारी युवा पीढ़ी प्राचीन भारतीय ज्ञान और विज्ञान को समझे और इसका लाभ उठाकर अपनी जीवन यात्रा को निर्देशित कर सके।

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