टैक्स की दोहरी मार झेल रहे बस संचालक, टैक्स को माफ करने की मांग
मेदिनीनगर। लॉक डॉउन ने बसों की पहियों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। जिले में बसों के पहिए पिछले पांच महीने से थमे हुए हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए बसों के परिचालन पर अभी भी संशय बरकरार है, जिसकी वजह से बस संचालकों को टैक्स की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। बस ओनर एसोसिएशन कई बार सरकार से राहत की गुहार भी लगा चुके हैं। लगातार टैक्स माफ किए जाने की मांग कर रहे हैं। पलामू जिला ट्रांस्पोर्ट ऐसोसिएशन के प्रवक्ता किरण कुमार सिंह ने बताया कि पलामू में 250 यात्री बसों का परिचालन होता था। इस कारण बस संचालकों सहित उनके कर्मचारियों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। मेदिनीनगर से रांची,औरंगाबाद, बिहार रूट के लिए 40 से 45 बसें हर दिन खुलती हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़, यूपी, बिहार के गया, पटना, सासाराम के लिए अलग-अलग बसों का परिचालन होता है। जानकारी के अनुसार पलामू, गढ़वा, लातेहार से होकर दूसरे जिले और राज्यों के लिए कई इलाकों में बसें ही यात्रा का एकमात्र साधन था। ऐसे इलाकों में मेदिनीनगर के महुआडांड़ (वाया-बेतला-गारू), मेदिनीनगर के गढ़वा के बड़गड़ (वाया चैनपुर रमकंडा), मेदिनीनगर से मनातू के चक (वाया पाटन-नावाजयपुर), मेदिनीनगर से लातेहार के बालूमाथ (वाया पांकी-हेरहंज), मेदिनीनगर से पांडू (वाया पंडवामोड़-विश्रामपुर), मेदिनीनगर से गढ़वा के चिनिया (वाया करसो, केल्हार और रंका), मेदिनीनगर से बिहार के इमामदगंज, बिहार (छतरपुर-डुमरिया) शामिल हैं। परिवहन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दो क्वार्टर का टैक्स माफ हो सकता है। इसके लिए कागजी प्रक्रिया चल रही है। प्रस्ताव तैयार होने के बाद कैबिनेट की स्वीकृति लेनी होगी। कई मंत्री कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। लिहाजा, इसमें थोड़ा वक्त लग सकता है। पलामू जिला ट्रांस्पोर्ट ऐसोसिएशन के प्रवक्ता किरण कुमार सिंह ने बताया कि आर्थिक रूप से संपन्न बस ऑपरेटर तो टैक्स जमा कर दे रहे हैं, लेकिन ज्यादातर बस ऑपरेटर ऐसे हैं, जो कर्ज में डूबे हुए हैं। उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है। इसलिए जरूरी है कि सरकार राहत के बाबत प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही इसकी घोषणा कर दे।





