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सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:39 · नई दिल्ली संस्करण

Brazil Election Result: लूला की जीत, कहा- ब्राजील किसी के दबाव में नहीं

ब्राजील में लूला डा सिल्वा ने फिर राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। उन्हें ट्रंप के विरोधी के तौर पर देखा जाता है। जीत के बाद लूला ने कहा, ब्राजील किसी के प्रभाव में नहीं है। हम अमेरिका का सम्मान करते हैं, लेकिन हम किसी की कॉलोनी नहीं हैं। ब्राजील अपना फैसला खुद लेगा। चुनाव में लूला के प्रतिद्वंद्वी ट्रंप के करीबी माने जा रहे थे। जनता ने स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रवाद को चुना है। लूला अगले महीने शपथ लेंगे।

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन1 बार पढ़ा गया
Brazil Election Result: लूला की जीत, कहा- ब्राजील किसी के दबाव में नहीं

ब्रासीलिया। ब्राजील में एक बार फिर लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। लूला को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के धुर विरोधी के तौर पर देखा जाता है। जीत के बाद अपने पहले भाषण में लूला ने साफ कहा कि ब्राजील किसी भी बाहरी ताकत के दबाव में काम नहीं करेगा। ब्राजील की विदेश नीति स्वतंत्र रहेगी और देश के हित ही सबसे ऊपर रहेंगे।


इस चुनाव को पूरी दुनिया की नजर से देखा जा रहा था। एक तरफ अमेरिका में ट्रंप प्रशासन है जो लैटिन अमेरिकी देशों पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है, तो दूसरी तरफ ब्राजील में लूला जो शुरू से ही अमेरिका की दखलअंदाजी वाली नीति का विरोध करते रहे हैं। यही कारण है कि इस चुनाव को ट्रंप बनाम लूला की विचारधारा की लड़ाई के रूप में भी देखा गया।


चुनाव परिणाम आते ही लूला के समर्थकों में जश्न का माहौल है। राजधानी ब्रासीलिया से लेकर साओ पाउलो तक सड़कों पर हजारों लोग जमा हो गए। लोगों ने लूला के नाम के नारे लगाए। लूला ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि ये जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि ब्राजील के गरीब, मजदूर और आम जनता की जीत है।


उन्होंने कहा, "ब्राजील किसी के प्रभाव में नहीं है। हम अमेरिका का सम्मान करते हैं, लेकिन हम किसी के कॉलोनी नहीं हैं। हम अपना फैसला खुद लेंगे। ब्राजील की जनता ने तय किया है कि देश को किस दिशा में जाना है।"


लूला ने अपने भाषण में अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और गरीबी जैसे मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का पहला लक्ष्य अमेजन के जंगलों की रक्षा करना और देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को कम करना होगा। उन्होंने वादा किया कि गरीब परिवारों के लिए चलाई जा रही सामाजिक योजनाओं को और मजबूत किया जाएगा।


वहीं, ट्रंप के करीबी माने जा रहे उनके प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्राजील की जनता ने राष्ट्रवाद और स्वतंत्र विदेश नीति को चुना है। जनता नहीं चाहती कि ब्राजील का फैसला वाशिंगटन में लिया जाए।


अमेरिका के साथ संबंधों पर लूला ने कहा कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन बराबरी के स्तर पर। कोई भी देश हमें आदेश नहीं दे सकता। व्यापार, पर्यावरण और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग होगा, लेकिन ब्राजील के हितों से समझौता नहीं होगा।


इस जीत के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा संदेश गया है। लूला को लैटिन अमेरिका में वामपंथी राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है। उनकी जीत से अर्जेंटीना, कोलंबिया और चिली जैसे देशों को भी मजबूती मिलेगी जो अमेरिका के दबाव की नीति का विरोध करते हैं।


फिलहाल चुनाव आयोग ने लूला की जीत की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। अगले महीने वह राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। बंटे हुए देश को एकजुट करना और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

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