युवक की दोनों किडनियां खराब, मां देना चाहती है किडनी
युवक की दोनों किडनियां खराब, मां देना चाहती है किडनीनैनीताल, 27 फ़रवरी । वक्त बुरा हो तो राजा भी रंक हो जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ है अब से करीब 7 वर्ष पूर्व तक आर्थिक रूप से सशक्त रहे अल्मोड़ा जनपद के लमगड़ा क्षेत्र के ग्राम सांगड़ साहू निवासी 37 वर्षीय रवींद्र नारायण सिजवाली पुत्र धन सिंह सिजवाली के साथ।पहले पथरी और फिर दोनों किडनी सिकुड़ जाने की बीमारी के कारण रवींद्र की करीब 12 लाख रुपये की जमा पूंजी के साथ करीब 15 लाख रुपो खर्च होने के साथ उनके संसाधन पूरी तरह खत्म हो चुके हैं, और अभी भी उन्हें अपने उपचार के लिए करीब 9 लाख रुपयों की जरूरत है, और इसके लिए उन्हें आम लोगों से मदद की गुहार लगानी पड़ रही है।रवींद्र ने बताया कि उनका पिता पूर्व में सहारनपुर उत्तर प्रदेश में अच्छे से स्थापित थे लेकिन वहां से गांव लौटने के बाद उनके परिवार पर अचानक एक के बाद एक समस्याएं आनी शुरू हुईं। पिता 2006 में एक दुर्घटना का शिकार हो गए और उनकी याद दास्त चली गई। करीब 6 वर्षों तक इस स्थिति में रहने के बाद आखिर उनकी मृत्यु हो गई।पिता की दुर्घटना के दौरान ही वर्ष 2006 से रवींद्र को पथरी की समस्या आने लगी। रवींद्र तब ठेकेदारी करते थे। उनके पास डम्पर और टैक्सियां भी थीं, जिनका वह संचालन करते थे। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने थोड़ा स्वास्थ्य ठीक होने पर 2014 में उन्होंने जनसेवा करते हुए अपने प्रयासों से सांगड़ क्षेत्र पंचायत सीट के महिला के लिए आरक्षित रहने पर अपनी माता को क्षेत्र पंचायत का चुनाव भारी मतों से जिताया। इस बीच अपनी दो बड़ी बहनों की शादी भी कराई, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने पर खुद की शादी नहीं हुई।क्योंकि उनकी किडनियों में समस्या आ गई थी। इसके उपचार के लिए उन्हें अपना डम्पर व टैक्सियां करीब 4 लाख रुपये नुकसान में बेचनीं पड़ी। पिछले करीब 7 वर्षों में किडनियों के उपचार के लिए वह अपनी जमा-पूंजी के 10-12 लाख रुपये सहित करीब 15 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। इसके बावजूद अभी स्थिति यह है कि उनकी दोनों किडनियां सिकुड़ गई है। इसके लिए वह बेस अस्पताल में लगातार आयुष्मान से डायलिसिस कराते हैं।अभी उनके पास आय का स्रोत केवल 62 वर्षीय मां को मिलने वाली 1500 रुपये की पेंशन है। मां अपनी किडनी देने को तैयार हैं। बरेली के राममूर्ति अस्पताल ने किडनी ट्रांसप्लांट करने में करीब 9 लाख रुपए का खर्चा बताया है, जबकि वह नियमित डायलिसिस कराने के लिए हल्द्वानी आने-जाने वहां रुकने के लिए जान-पहचान वालों की मदद के मोहताज हैं।





