हरियाणा में कृषि नलकूप होंगे सौर ऊर्जा से लैस, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का निर्देश: हर जिले में दो कृषि फीडर के सौरकरण की योजना

हरियाणा में कृषि नलकूप होंगे सौर ऊर्जा से लैस, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का निर्देश: हर जिले में दो कृषि फीडर के सौरकरण की योजना
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 11 जुलाई 2025:हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के कृषि क्षेत्र में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी कृषि नलकूपों को चरणबद्ध रूप से सौर ऊर्जा से जोड़ा जाए। यह निर्देश उन्होंने चंडीगढ़ में आयोजित प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (PM-KUSUM) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। इस बैठक में राज्य के ऊर्जा मंत्री श्री अनिल विज समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने हरियाणा पॉवर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में कम से कम दो कृषि फीडर को पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलाने के लिए चिन्हित करें, और उनके लिए पांच-पांच एकड़ भूमि पर सोलर पैनल लगाए जाएं। इस पहल से किसानों को स्थायी, सस्ती और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
उन्होंने विशेष रूप से पंचकूला जिले के गन्नी खेड़ा गांव में स्थित लगभग 300 एकड़ भूमि पर बड़े पैमाने पर सोलर प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा, जिससे क्षेत्र के सभी कृषि नलकूपों और सार्वजनिक संस्थानों को हरित ऊर्जा से जोड़ा जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि पंचकूला के कॉलेज, उपायुक्त कार्यालय, पिंजौर मंडी और बस स्टैंड जैसी सार्वजनिक स्थलों पर भी सोलर पैनल लगाए जाएं।
एक अभिनव पहल के तहत मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां भी पंचायतें सोलर प्लांट के लिए भूमि उपलब्ध करवाएंगी, वहां पैनल स्ट्रक्चर इस प्रकार तैयार किया जाए कि वे सामाजिक आयोजनों के लिए उपयोगी "कल्याणम मंडपम" के रूप में भी कार्य कर सकें।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड की मंडियों और हरियाणा भंडार निगम के गोदामों की छतों पर सौर पैनल लगाए जाएंगे, जिससे प्राप्त ऊर्जा का उपयोग कृषि और भंडारण आवश्यकताओं में किया जा सके।
बिजली विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह ने जानकारी दी कि 2018-19 से अब तक 1.58 लाख से अधिक सोलर पंप लगाए जा चुके हैं, और वित्त वर्ष 2025-26 में 70,000 नए पंपों के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 600 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। योजना के अंतर्गत 3 से 10 हॉर्सपावर के पंपों की लागत का 25% किसान वहन करते हैं, जबकि शेष 75% लागत केंद्र और राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में दी जाती है।
मुख्यमंत्री सैनी ने सोलर पंपों के खराब होने की शिकायतों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए और कहा कि ऐसे मामलों में अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से किसानों से संवाद करना चाहिए, साथ ही उन गांवों में विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, जहां सोलर पंपों की संख्या अधिक है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, वित्त सचिव सी.जी. रजनीकांतन, नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की निदेशक डॉ. प्रियंका सोनी, मुख्यमंत्री के ओएसडी बी.बी. भारती सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री सैनी का यह निर्णय हरियाणा को हरित ऊर्जा की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने और किसानों को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





