नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर मिशन को जमीन पर उतार रहे हैं युवा चंद्रशेखर
-बचपन में उठ गया पिता का साय- मां ने पढ़ाकर बनाया काबिल-खुद लिखी अपनी तकदीरपटना। दर्द सबके एक है, मगर हौंसले सबके अलग अलग है, कोई हताश हो के बिखर गया, तो कोई संघर्ष करके निखर गया। इसी शब्द को आत्मसात करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्ममिर्भर मिशन को बिहार में समस्तीपुर जिले के सैदपुर गांव निवासी 32 वर्षीय युवा चंद्रशेखर न केवल पूरा कर रहे हैं, बल्कि उसे जमीन पर उतार भी चुके है।हर मां-बाप का सपना होता है कि बेटा पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी करे। पिता का साया बचपन में ही छिन जाने के बाद चंद्रशेखर की मां ने भी यह सपना देखा था कि बेटा पढ़ लिखकर एक अच्छी नौकरी करेगा लेकिन चंद्रशेखर के दिमाग में पीएम मोदी के आत्मनिर्भर शब्द उनके शैक्षणिक काल से ही घर कर गए थें। पिता का साय बचपन में ही गंवा देने वाले चंद्रशेखर की मां ने अपने बेटे की परवरिश की और उनकी शिक्षा-दीक्षा का भी ख्याल रखते हुए पुणे से यांत्रिकी की डिग्री दिलायी। डिग्री लेने के बाद चंद्रशेखर ने कुछ दिन नौकरी की और अपने सपनों को उड़ान देने के लिए पुणे जैसे महानगर को चार वर्ष पहले छौड़ अपने गांव सैदपुर पहुंच गए।हिन्दुस्थान समाचार से खास बातचीत में चंद्रशेखर ने बताया कि जॉब छोड़ने के बाद घर के लोग नाराज थे लेकिन मैंने उन सभी को समझाया कि मैं अपने गांव और समाज के लोगों के बीच रहकर अपनी तरक्की के साथ उनकी तरक्की का मार्ग खोलूंगा । उनकी बातें उनकी अविभावक मां को समझ में आयी और उन्होंने चंद्रशेखर को इसके लिए अपनी इजाजत दे दी।चंद्रशेखर ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व अपने गांव में कृषि उपकरण बनाने वाली उन्नती इंटरप्राइजेज नामक कंपनी की नींव डाली। उन्होंने कहा कि कृषि उपकरण बनाने और उसके मेंटेनेंस का आइडिया दिमाग में इसलिए आया था कि मेरे गांव सहित आस-पड़ोस के गांव में अधिकतर लोगों कृषि क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।चंद्रशेखर ने बताया कि शुरुआत के दिनों में संघर्ष करना पड़ा ,लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ पटरी पर लौटने लगा। कोरोना की वजह से भी खासा नुकसान हुआ लेकिन इन सबके बीच उन्नती इंटरप्राइजेज का टर्नओवर 75 लाख के करीबी पहुंच चुका है।यानि की साल की बात करे हर साल 25 लाख का टर्नओवर कंपनी के द्वारा अभी तक दिया गया है। उन्होंने बताया कि अपने गांव में स्वरोजगार के क्षेत्र में काम करके आनंद आ रहा है। शुरुआत में कुछ लोगों ने उपहास भी उड़ाय कि देखिये पढ़-लिखकर लोह-लकड़ का काम कर है, इससे क्या होगा कहीं नौकरी करता तो अच्छा होता। आज वही लोग सम्मान की नजरों से देख रहे हैं।चंद्रशेखर ने अपनी भावी योजना के बारे में बातचीत करते हुए कहा कि हम रेलवे के कामों में लगने वाले पेंट के निर्माण पर काम कर रहे हैं। इसको लेकर लोन की आवश्यकता के लिए नबार्ड से बातचीत चल रही है। इस वित्तीय वर्ष के आखिरी तक इस काम को भी शुरु कर दिया जायेगा। सौम्य स्वाभाव के धनी चंद्रशेखर न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बने है,बल्कि आस-पड़ोस के गांव सहित अपने गांव के युवा को भी रोजगार दे रहे हैं।





