रेलवे थर्ड लाईन पर काम शुरू, 200 परिवारों पर आयेगी आफत
मेदिनीनगर। धनबाद रेल मंडल से मुगलसराय के बीच सोननगर से बरकाकाना तक तीसरी लाइन बिछाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। तीसरी रेल लाईन बिछाने की प्रक्रिया शुरू होते ही निगम क्षेत्र के आबादगंज व जेलहाता क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण कर मकान बना कर रह रहे लोगों के माथे पर आफत का बादल मंडराना शुरू हो गया है। रेलवे ने उन मकानों को अपने कब्जे में लेने की विभागीय प्रक्रिया शुरू दी है। इस वजह से अगर रेलवे ने उन स्थानों को कब्जे में लिया तो रेलवे लाईन से सटे करीब 200 परिवार जो मकान बना कर पिछले तीन से चार पीढ़ियों से रह रहे हैं उन्हें हटना पड़ेगा। कई लोगों ने बताया कि उनका परिवार इस स्थान पर पिछले तीन से चार पीढ़ियों से मकान बना कर रह रहा है। उन्हें तो मामूल भी नहीं है कि यह जमीन रेलवे की है। उन लोगों के पास वोटर आईडी, आधार कार्ड, नगर निगम का रसीद आदि भी कट रहा है। हालांकि निगम द्वारा उन स्थानों पर रेलवे की जमीन होने के कारण कोई भी विकास काम नहीं कराया गया है। सबसे पहले रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाया जा रहा है। वैसे ही शहर के आबादगंज के साथ रेलवे लाइन की बगल में बने मकानों और चहारदीवारी को हटाने के लिए 29/1/020 को नोटिस भी रेलवे के द्वारा दी गई थी। पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी के हस्तक्षेप के कारण उस समय अतिक्रमण का काम रोक दिया गया था। उन्होंने इसके लिए समय मांगी थी। समय की मियाद भी पूरी हो चुकी है। रेलवे अब कोई भी बड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। फिलहाल रेलवे के लिए सबड़ी समस्या है आबादगंज व जेलहाता में रेलवे लाईन से सटे क्षेत्र में पिछले 50 से 60 सालों से रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण कर मकान बना कर रहने वाले लोगों को खाली कराना है। रेलवे की अधिकारी जब भी अतिक्रमण हटाने के लिए स्थल पर पहुंचते है तब राजनीति हावी हो जाती है। हंगामा के कारण दो बार से रेलवे के अधिकारियों को बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है। शहरवासी को होगी परेशानी थर्ड लाइन बन जाने से जहां लोगों को सुविधा होगी। वहीं शहर की एक खास आबादी को शॉर्टकट रास्ता के बदले लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। मसलन जो लोग रेलवे के नीचे की जमीन का इस्तेमाल आने-जाने के लिए करते थे,वे अब रेलवे क्रासिंग का इस्तेमाल करेंगे। इससे गंतव्य तक पहुंचने में समय ज्यादा लगेगा। दूसरी तरफ मकान,चहारदीवारी टूट जाने से रास्ते का चयन दूसरी तरफ मोड़ना होगा।





