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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:43 · नई दिल्ली संस्करण

पश्चिम बंगाल: मिड-डे मील पर आवंटित बजट का 25 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर पाई ममता सरकार

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पश्चिम बंगाल: मिड-डे मील पर आवंटित बजट का 25 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर पाई ममता सरकार

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील योजना के बारे में हैरान करने वाले आंकड़े आए हैं। राज्य विधानसभा में पिछले हफ्ते पेश अंतरिम बजट के दस्तावेज से खुलासा हुआ है कि मिड-डे मील योजना के लिए आवंटित बजट में से बहुत कम राशि खर्च की गई है।

बजट दस्तावेज के अनुसार, पिछले दो वित्तीय वर्षों 2024-25 और 2023-24 के लिए स्थिति दयनीय थी। वित्तीय वर्ष 2024-25 में मिड-डे मील के लिए बजटीय आवंटन 2,299.30 करोड़ रुपए था, लेकिन उस वर्ष वास्तविक खर्च सिर्फ 241.96 करोड़ रुपए रहा, जो कुल आवंटन का मात्र 10.52 प्रतिशत है। उससे पहले, वित्तीय वर्ष 2023-24 में मिड-डे मील के लिए 2,377 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया गया था, लेकिन वास्तविक उपयोग सिर्फ 515.04 करोड़ रुपए रहा, यानी 21.66 प्रतिशत।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य में मिड-डे मील के लिए 1,673.12 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। हालांकि, 2025-26 के संशोधित अनुमानों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक सिर्फ 320.01 करोड़ रुपए (सिर्फ 19.12 प्रतिशत) ही खर्च किए जा सकेंगे।

इसका मतलब है कि तीनों वित्तीय वर्षों को मिलाकर पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील के बजटीय आवंटन का औसत प्रतिशत उपयोग सिर्फ 16.96 फीसदी है।

माना जा रहा है कि पिछले कम प्रतिशत उपयोग को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने 2026-27 के वित्तीय वर्ष के लिए इस योजना के लिए बजटीय आवंटन को घटाकर 1,150.90 करोड़ रुपए कर दिया है, जो 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के संबंधित आंकड़ों से काफी कम है।

राज्य वित्त विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "2025-27 के लिए मिड-डे मील के लिए 1,150.90 करोड़ रुपए का यह बजटीय आवंटन अंतिम आंकड़ा नहीं हो सकता है और इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद नई राज्य कैबिनेट की ओर से पूर्ण बजट पेश करने के बाद इसमें संशोधन किया जा सकता है।

पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील के लिए कम खर्च की यह जानकारी उस समय आई है, जब पिछले साल जून में केंद्र सरकार ने मिड-डे मील योजनाओं का लाभ उठाने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट पर चिंता व्यक्त की थी।

केंद्र सरकार के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने भी इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें इसे राज्य में स्कूल छोड़ने वालों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण बताया गया था।

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