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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:34 · नई दिल्ली संस्करण

उत्तर प्रदेश: समयपूर्व रिहाई नीति पर राजभवन में मंथन, कारागार सुधार को मिले नए दिशा-निर्देश

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
उत्तर प्रदेश: समयपूर्व रिहाई नीति पर राजभवन में मंथन, कारागार सुधार को मिले नए दिशा-निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की कारागार व्यवस्था को सुधारात्मक, पारदर्शी और मानवीय स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में राजभवन में समयपूर्व रिहाई से जुड़े प्रस्तावित शासनादेश पर उच्चस्तरीय बैठक हुई।

बैठक में जेल सुधार, बंदियों के अधिकार, आय सृजन और आधुनिक तकनीक के उपयोग को लेकर अहम निर्देश दिए गए।

बैठक में प्रस्तावित शासनादेश के उद्देश्यों, प्रावधानों, पात्रता मानदंडों और प्रक्रिया पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। राज्यपाल ने विषय की संवेदनशीलता और सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित नीति की गहन समीक्षा की और निर्देश दिए कि समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, न्यायसंगत और सुधारात्मक उद्देश्य के अनुरूप होनी चाहिए, जिससे बंदियों के हित सुरक्षित रह सकें और समाज में उनका सकारात्मक पुनर्वास संभव हो।

उन्होंने कारागारों में निरुद्ध बंदियों को उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा करते हुए स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता देने पर बल दिया तथा जेल व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने के स्पष्ट निर्देश दिए। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुजरात स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय रक्षा शक्ति महाविद्यालय और इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के अपने हालिया दौरों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि इन संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फॉरेंसिक विज्ञान और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अपराध जांच और पहचान की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाया गया है।

राज्‍यपाल ने अधिकारियों को ऐसे प्रतिष्ठित संस्थानों के भ्रमण के लिए प्रेरित किया, ताकि नवीन तकनीकों को अपनाकर कारागार व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

कारागार सुधार के तहत राज्यपाल ने निर्देश दिए कि जेल परिसरों में बंदियों द्वारा उत्पादित सब्जियों के उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए और इन्हें समीपवर्ती आंगनबाड़ी केंद्रों तथा प्राथमिक विद्यालयों के मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम से जोड़ने पर विचार किया जाए।

उन्होंने बंदियों के आय सृजन और आत्मनिर्भरता पर विशेष बल देते हुए कहा कि उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण और उत्पादक गतिविधियां उपलब्ध कराई जाएं, जिससे जेलों को आदर्श कारागार के रूप में विकसित किया जा सके। राज्यपाल ने महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे छोटे बच्चों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं को संवेदनशीलता के साथ सुनिश्चित करने को कहा।

इसके साथ ही उन्होंने कारागारों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए तथा गृह विभाग और कारागार विभाग के बीच प्रभावी समन्वय पर जोर दिया। राज्यपाल ने अधिकारियों को कारागारों का आकस्मिक निरीक्षण करने और निर्धारित मानकों के कड़ाई से अनुपालन को सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

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