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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:55 · नई दिल्ली संस्करण

यूजीसी का नया नियम समाज के लिए 'लड़ो और मरो वाली' मशीन: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
यूजीसी का नया नियम समाज के लिए 'लड़ो और मरो वाली' मशीन: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

वाराणसी। यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नई गाइडलाइंस को लेकर विवाद तेज हो गया है। आरोप लग रहे हैं कि ये नियम हिंदू समाज और ऊंची जातियों के साथ भेदभाव दिखाते हैं। इसको लेकर संत समाज भी आक्रोशित दिख रहा है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि यूजीसी का नियम सनातन धर्म के लिए बड़ा खतरा है।

शंकराचार्य के अनुसार, सनातन धर्म में जातियां किसी लड़ाई के लिए नहीं हैं, बल्कि यह परंपरा इसलिए बनाई गई थी ताकि हर व्यक्ति की आजीविका और जीवन सुरक्षित रह सके। ये पुराने समय की प्रथाएं हैं, जो समाज की स्थिरता के लिए बनाई गई थीं। यूजीसी के इस नियम ने अब एक जाति को दूसरी जाति के सामने खड़ा कर दिया है, जिससे लड़ाई और टकराव होना तय है। उनका कहना है कि यह पूरे सनातन धर्म के लिए एक तरह का खतरा है, मानो एक मशीन ले आए और कहे, "लड़ो और मरो।

शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि यूजीसी के नए नियमों का विरोध करना जरूरी है। उनका कहना है कि सनातन धर्म की हानि करने वाले नए नियमों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट केवल यह देख सकता है कि कानून में कोई संवैधानिक त्रुटि तो नहीं है, लेकिन कानून को पूरी तरह रोकना उसका काम नहीं है। संसद ने यह कानून पास किया है और गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि संसद का कानून सभी को मानना पड़ेगा।

स्वामी जी ने कहा कि असल समस्या यह है कि सवर्ण समाज सड़क पर है, लेकिन दूसरा समाज नहीं है।

उनका मानना है कि दूसरा समाज भी विरोध में आना चाहिए क्योंकि यह लड़ाई उनका भी हित है। अगर एक ही हिंदू समुदाय के अंदर दो अलग-अलग समाज खड़े हो जाएंगे, तो यह पूरी तरह समुदाय का विभाजन है। उन्होंने साफ कहा कि एक हिंदू समाज को दो हिस्सों में बांटना गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

वहीं, महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम अजित पवार का प्लेन क्रैश होना भी चर्चा में है। लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह कोई साजिश है। स्वामी जी ने कहा कि अगर कोई शंका है, तो उसका सामना किया जाना चाहिए और जांच कमेटी के माध्यम से कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे जनता के मन में भ्रम नहीं रहेगा और सही निष्कर्ष निकलेगा।

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