ड्रैगन और रूस की बढ़ी चिंता: अंतरिक्ष में अमेरिका की घेराबंदी, तैनात किए खतरनाक हथियार

स्पेस फोर्स के अधिकारियों ने चीन और भारत के महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रूस को अंतरिक्ष में सबसे बड़ा खतरा बताया है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि चीन और रूस द्वारा अंतरिक्ष को युद्धक्षेत्र बनाने की आक्रामक कोशिश की जा रही है, और अमेरिका के लिए अपने हितों की रक्षा में जवाब में कदम उठाना अनिवार्य हो गया है। यह उल्लेखनीय है कि अंतरिक्ष का सैन्यीकरण शीत युद्ध के दौर से ही शुरू हो गया था, जब 1957 में सोवियत संघ द्वारा स्पुतनिक उपग्रह लॉन्च किए जाने के बाद अमेरिका और सोवियत संघ ने अपने उपग्रहों की सुरक्षा और दुश्मन देशों के उपग्रहों को निष्क्रिय करने की तकनीकों पर काम शुरू किया था।
इसके बाद अमेरिका, रूस, चीन और भारत जैसे कई अन्य देशों ने ऐसे उन्नत सिस्टम विकसित किए हैं या उन पर गंभीरता से काम कर रहे हैं, जो जरूरत पड़ने पर दुश्मन के उपग्रहों को निशाना बना सकते हैं। अमेरिका ने अंतरिक्ष के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार कर लिया है कि उसने अंतरिक्ष में सामरिक हथियार तैनात कर दिए हैं। अमेरिकी स्पेस फोर्स द्वारा जारी किए गए बयान के अनुसार, ये हथियार किसी पर आक्रमण करने के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को दुश्मनों से सुरक्षित रखने के लिए अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किए गए हैं।
हालांकि, स्पेस फोर्स ने अभी तक इन हथियारों के सटीक मॉडलों का खुलासा नहीं किया है। यह महत्वपूर्ण जानकारी अमेरिकी वायु सेना के सचिव ट्रॉय मींक ने दुनिया के सामने रखी। नेशनल हार्बर में आयोजित एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने संबोधन में मींक ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में ऐसे हथियार तैनात कर दिए हैं, जो अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के अंतरिक्ष उपकरणों की प्रभावी ढंग से रक्षा करने तथा दुश्मन के किसी भी हमले को विफल करने में पूरी तरह सक्षम हैं। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिका लंबे समय से अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ से बचने का हवाला देते हुए ऐसे अभियानों को गुप्त रखता आया था।
अब यह पहला अवसर है जब अमेरिका ने सीधे तौर पर कक्षा में स्पेस कंट्रोल वेपन्स की मौजूदगी को सार्वजनिक रूप से कबूल किया है, जो उसकी अंतरिक्ष रणनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। स्पेस कंट्रोल वेपन्स के तहत अमेरिकी स्पेस फोर्स ने बताया कि इनमें भौतिक रूप से हमला करने वाले यानी काइनेटिक हथियार जैसे इंटरसेप्टर और बिना तबाही मचाए निष्क्रिय करने वाले नॉन-काइनेटिक हथियार जैसे लेजर, जैमर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेपन्स सिस्टम शामिल हैं। इन अत्याधुनिक हथियारों का उपयोग दुश्मन के सैटेलाइट की रडार प्रणाली को तोड़ने, उनके संचार संपर्क को बाधित करने या किसी भी संभावित खतरे को सीधे तबाह करने के लिए किया जा सकता है।





