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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:39 · नई दिल्ली संस्करण

गाजियाबाद निवासी हरीश राणा की इच्छामृत्यु की गुहार पर अहम फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
गाजियाबाद निवासी हरीश राणा की इच्छामृत्यु की गुहार पर अहम फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक अत्यंत संवेदनशील और मानवीय पहलू से जुड़े मामले में सुनवाई होगी। यह मामला गाजियाबाद के हरीश राणा से जुड़ा है, जो लगभग 13 वर्षों से स्थायी कोमा जैसी स्थिति में जीवन बिता रहे हैं। राणा के परिवार ने अदालत से जीवन रक्षक चिकित्सा सहायता हटाने और निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई है। इस मामले को लेकर पूरे देश में कानूनी और नैतिक बहस तेज हो गई है।

न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ इस याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी। हरीश राणा 2013 में छात्र जीवन के दौरान एक दुर्घटना में चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई थी।

उस दुर्घटना के बाद से ही वह बिस्तर पर हैं और स्थायी कोमा जैसी स्थिति में जीवन बिता रहे हैं। करीब 30 वर्षीय राणा 100 प्रतिशत विकलांगता और क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित हैं। उन्हें सांस लेने, भोजन करने और रोजमर्रा की देखभाल के लिए लगातार चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ती है।

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पहले एक प्राथमिक मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था ताकि यह जांच की जा सके कि क्या जीवन रक्षक उपचार को वापस लिया जा सकता है।

डॉक्टरों की टीम ने राणा के घर जाकर उनकी जांच की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि वह ट्रेकियोस्टोमी ट्यूब के जरिए सांस ले रहे हैं और गैस्ट्रोस्टॉमी ट्यूब के माध्यम से उन्हें भोजन दिया जा रहा है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि उनकी स्थिति में सुधार की संभावना लगभग बहुत कम है।

इसके बाद अदालत ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईएमएस), नई दिल्ली को भी एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित कर उनकी स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया था।

यह मामला मूल रूप से राणा के माता-पिता द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका से शुरू हुआ था। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि मेडिकल बोर्ड यह जांच करे कि क्या निष्क्रिय इच्छामृत्यु पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि भारतीय कानून के तहत सक्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति नहीं है। इसके बाद अगस्त 2024 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए मानवीय समाधान तलाशने को कहा गया था।

अब सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अंतिम फैसला सुनाने जा रहा है। यह निर्णय न केवल राणा के परिवार के लिए बल्कि देश में गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार से जुड़े कानूनी ढांचे के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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