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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:25 · नई दिल्ली संस्करण

रांची के तीन प्रमुख डैमों में अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त, डीसी से शपथ पत्र में मांगा ब्योरा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
रांची के तीन प्रमुख डैमों में अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त, डीसी से शपथ पत्र में मांगा ब्योरा

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के तीन प्रमुख जलस्रोतों, कांके डैम, धुर्वा डैम और गेतलसुद डैम एरिया के अतिक्रमण पर गंभीर चिंता जताते हुए जिला प्रशासन से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने रांची के उपायुक्त से शपथ पत्र के माध्यम से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इन तीनों डैमों के लिए कुल कितनी भूमि अधिग्रहित की गई थी, उसमें से कितनी जमीन पर अतिक्रमण है और अतिक्रमण हटाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

हाईकोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि क्या इन डैमों और उनके कैचमेंट एरिया का कभी सर्वे कराया गया है या नहीं। अदालत ने पिछली सुनवाई में दिए गए आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट रांची नगर निगम से भी मांगी है। इस दौरान नगर निगम की ओर से अधिवक्ता एलसीएन शाहदेव ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को निर्धारित की गई है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता शाहबाज अख्तर ने कोर्ट को बताया कि हिनू और हरमू नदी के किनारे तथा धुर्वा डैम क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए सरकार की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में अदालत से स्थगन आदेश प्राप्त होने के कारण वहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हो सकी है।

एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि धुर्वा डैम के किनारे अतिक्रमण कर घर बनाए जाने, उस भूमि की रसीद काटने और नक्शा स्वीकृति दिए जाने के मामलों में दोषी अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। इन प्राथमिकी के आधार पर एसीबी ने भी अलग से एफआईआर दर्ज कर ली है।

मामले में एमिकस क्यूरी इंद्रजीत सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि कांके, धुर्वा और गेतलसुद डैम के कैचमेंट एरिया में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है।

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट पूर्व में कई दिशा-निर्देश जारी कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। एमिकस क्यूरी ने सबसे गंभीर स्थिति कांके डैम की बताते हुए कहा कि वहां डैम की जमीन पर लोगों ने व्यापक रूप से कब्जा कर लिया है, जो भविष्य में जलसंकट का कारण बन सकता है।

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