सवर्ण महासंघ फाउंडेशन ने प्रधान के इस्तीफे को बताया सही कदम, शिक्षा नीतियों की समीक्षा की मांग

पूर्वी सिंहभूम। सवर्ण महासंघ फाउंडेशन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे स्वागतयोग्य कदम बताया है। संगठन ने कहा कि यह निर्णय भले ही देर से लिया गया हो, लेकिन उचित है। साथ ही संगठन ने उनके कार्यकाल के दौरान लागू की गई कुछ शिक्षा नीतियों और प्रावधानों पर भी सवाल उठाए।
शनिवार को जारी बयान में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डीडी त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते ऐसी नीतियां लागू की गईं, जिनसे सनातन धर्म और सवर्ण समाज के हित प्रभावित हुए। उन्होंने विशेष रूप से यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट-2026 का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इसके माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को सवर्ण समुदाय के विरुद्ध असंतुलित अधिकार देने का प्रयास किया गया।
त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि संबंधित कानून में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी की गई है। उनके अनुसार, इसमें बिना समुचित सुनवाई के कार्रवाई का प्रावधान किया गया, जो न्याय व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि संगठन लगातार ऐसी नीतियों का विरोध करता रहा है और अब उनका परिणाम सामने आया है।
संगठन ने अपने बयान में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को उनकी नीतियों के प्रति जनता की असहमति का परिणाम बताया और इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम करार दिया। साथ ही कहा कि सवर्ण महासंघ फाउंडेशन भविष्य में भी शिक्षा व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता और संविधान सम्मत नीतियों की मांग करता रहेगा।-





