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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:44 · नई दिल्ली संस्करण

राष्ट्रपति की मंजूरी और संसद की स्वीकृति के बाद बदला दक्षिण भारत के इस राज्य का नाम

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
राष्ट्रपति की मंजूरी और संसद की स्वीकृति के बाद बदला दक्षिण भारत के इस राज्य का नाम

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर 'केरल (नाम परिवर्तन) अधिनियम, 2026' को 25 अगस्त 2026 से पूरे देश में लागू कर दिया है। इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही दक्षिण भारतीय राज्य 'केरल' का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से 'केरलम' हो गया है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने कानून के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए 25 अगस्त 2026 की तिथि तय की है। इससे पूर्व, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026' को अपनी स्वीकृति प्रदान की थी, जिसके बाद इसने अधिनियम का रूप लिया। संसद के चालू सत्र के दौरान लोकसभा ने 11 अगस्त को तथा राज्यसभा ने 12 अगस्त को इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था।

केरल का आधिकारिक नाम अब ‘केरलम’ हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर केरल (नाम परिवर्तन) अधिनियम, 2026 को 25 अगस्त 2026 से लागू करने की घोषणा की है। इसके साथ ही राज्य के नाम को आधिकारिक रूप से ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ कर दिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना में कहा गया है कि अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केंद्र सरकार ने 25 अगस्त 2026 को कानून के प्रावधान लागू होने की तिथि निर्धारित किया है।

इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी थी, जिसके बाद यह कानून बन गया। लोकसभा ने 11 अगस्त को और राज्यसभा ने 12 अगस्त को विधेयक को पारित किया था। नाम परिवर्तन की प्रक्रिया वर्ष 2024 में शुरू हुई थी। केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने की मांग की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया था।

विधानसभा के प्रस्ताव में कहा गया था कि मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ कहा जाता है। प्रस्ताव को 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन और मलयालम भाषी लोगों के लिए एकीकृत राज्य के ऐतिहासिक आंदोलन से भी जोड़ा गया था। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी राज्य के नाम, क्षेत्र या सीमाओं में बदलाव करने का अधिकार है। इस अधिनियम के लागू होने के बाद संविधान और अन्य संबंधित कानूनों में आवश्यक संशोधन तथा परिणामी बदलाव किए जाएंगे।

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