विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में शोध को प्रोत्साहित करके राष्ट्र को दी जा सकती है गति : बालागुरुसामी
रांची। झारखंड के राज्यपाल के शैक्षणिक सलाहकार प्रो. ई. बालागुरुसामी ने गुरुवार को कहा कि विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में शोध को प्रोत्साहित करके राष्ट्र के आर्थिक विकास को गति दी जा सकती है। इसके माध्यम से भारत को सम्पन्न और विकसित राष्ट्र बनाने में सहायता मिलेगी।
बालागुरुसामी गुरुवार को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार के द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में झारखंड के उच्च शिक्षा संस्थानों में विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में शोध के प्रोत्साहन के लिए आयोजित दो दिवसीय संवादात्मक कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को विशिष्ट वक्ता के रूप में सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शैक्षणिक संस्थानों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे शोध की दिशा में एकल प्रयास न करके एकीकृत प्रयास करें। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में शोध की सम्भावनाओं को तलाशने पर बल दिया। उन्होंने उच्च एवं शिक्षा तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा शोध कार्य को बढ़ावा दिए जाने वाले प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शोधार्थियों एवं शिक्षकों को इसका लाभ लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए अनुसन्धान को अपेक्षित और आवश्यक बताया। इसके साथ शोध के लिए आधारभूत संरचना के विकासार्थ आर्थिक संसाधनों की प्राप्ति पर बल दिया। उन्होंने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अहं का त्याग करते हुए सामूहिकता में कार्य करने की बात कही। उन्होंने व्यावहारिक आशावाद पर बल दिया।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार के प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार ने कहा कि राज्य में झारखंड राज्य संकाय विकास अकादमी की स्थापना की जायेगी। उन्होंने कहा कि शोध कार्यों, नवाचार आदि को प्रोत्साहित करने के लिए पृथक बोर्ड की स्थापना की जायेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य में सरकारी विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों से पीएचडी करने वाले उम्मीदवारों के लिए फेलोशिप आरम्भ किया जाना प्रस्तावित है।
यूजीसी नेट,सीएसआईआर नेट उत्तीर्ण छात्रों के लिए 25000 रुपये प्रति माह और झारखंड पात्रता परीक्षा (जेईटी) उत्तीर्ण छात्रों के लिए 22500 रुपये प्रति माह की राशि चार साल की अवधि के लिए दी जाएगी। इस योजना से प्रतिवर्ष कुल 1000 छात्र लाभान्वित होंगे। उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अन्तर्विषयक अनुसन्धान पर बल देते हुए कहा कि शोध परिणाम सामाजिक-आर्थिक विषमता को दूर करने में सहायक हो।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि प्रभूत प्राकृतिक संसाधनों एवं विपुल तथा जीवन्त मानव संसाधन से युक्त झारखंड राज्य में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अनुसन्धान की असीम सम्भावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि अनुसन्धान के क्षेत्र में अनेक चुनौतियां हैं लेकिन सरकार, निजी क्षेत्र तथा शैक्षणिक एवं अनुसन्धान संस्थानों के बीच सहयोगात्मक प्रयास से इन चुनौतियों से पार पाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासी समुदायों के पास कृषि, वानिकी और औषधीय पौधों से संबंधित स्वदेशी ज्ञान का भण्डार है। इस पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसन्धान के साथ एकीकृत करने से टिकाऊ और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील समाधान प्राप्त हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसन्धान को बढ़ावा देने के लिए समावेशी शैक्षिक पहल की आवश्यकता है जो राज्य के हर कोने तक पहुंचे। साथ ही कहा कि मुख्य रूप से कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को देखते हुए झारखंड के सतत विकास के लिए कृषि में अनुसन्धान सर्वोपरि है।
उन्होंने कहा कि झारखंड में अनुसन्धान के लिए निरंतर प्रतिबद्धता, दूरदर्शी नेतृत्व और समाज के सभी क्षेत्रों से सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है। अनुसन्धान पहल की सफलता के लिए सरकार से निरंतर समर्थन, शिक्षा जगत, उद्योग और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता आवश्यक है।





