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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · दोपहर 12:30 · नई दिल्ली संस्करण

गरीबी उन्मूलन के खिलाफ प्रस्ताव लाकर मनरेगा और खाद्य सुरक्षा की बुनियाद रखी गयी थी : रामेश्वर

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

रांची। झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव ने कहा है कि 1885 में पार्टी की स्थापना के बाद 1886 में आयोजित दूसरे अधिवेशन में ही गरीबी उन्मूलन के खिलाफ प्रस्ताव लाकर मनरेगा और खाद्य सुरक्षा की बुनियाद रखी गयी थी। जबकि 10वें अधिवेशन में कपास टैक्स का विरोध कर किसान हितैशी इरादे जाहिर किये गये थे। उरांव ने मंगलवार को बताया कि देश की आजादी के लिए अपने संघर्षों, इतिहास और राष्ट्र निर्माण में योगदान को लेकर ‘धरोहर’ नाम से वीडियो श्रृंखला के तहत आज जारी दूसरी कड़ी में गरीबी उन्मूलन और किसान हित को लेकर किये गये कार्यां में बारे में पूरी जानकारी दी गयी है। उन्होंने बताया कि धरोहार नाम से जारी पहली कड़ी में कांग्रेस की स्थापना के उद्देश्य और भारत माता की आजादी के पवित्र लक्ष्यों के बारे में जानकारी दी गयी थी। आजादी की ये लौ कांग्रेस के आने वाले अधिवेशनों में लगातार बढ़ती गयी। 1885 में कांग्रेस का पहला सत्र मुंबई में आयोजित की गयी, इसकी अध्यक्षता उमेश चन्द्र बनर्जी ने 72 प्रतिनिधियों की उपस्थिति में की। पहले अधिवेशन में विधानमंडल में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाने की मांग करते हुए भारतीय प्रशासन के कामकाज के लिए आयोग की नियुक्ति के साथ भारत परिषद को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही सैन्य खर्च में कमी के साथ सिविल सेवा में सुधार की मांग रखी गयी। 1886 में दादा भाई नौरोजी की अध्यक्षता में कोलकाता में आयोजित दूसरे अधिवेशन में पहले अधिवेशन के 72 प्रतिनिधियों के मुकाबले 434 लगभग छह गुणा ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस अधिवेशन में कांग्रेस द्वारा गरीबी उन्मूलन के बारे में प्रस्ताव रखने को मनरेगा तथा खाद्य सुरक्षा कानून जैसी योजनाओं की वैचारिक नींव माना जा सकता है। कोलकाता के इसी अधिवेशन में मताधिकार जैसी बड़ी मांग सबसे पहले सामने आयी। 1887 में बदरूद्दीन तैयबजी की अध्यक्षता में हुए अधिवेशन में आर्म्स एक्ट के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया। 1889 में मुंबई अधिवेशन में 21वर्षीय मताधिकार का प्रस्ताव पारित किया गया। 1890 में कोलकाता अधिवेशन में पहली महिला ग्रेजुएट कादिम्बनी गांगुली ने हिस्सा लिया। 1894 के अधिवेशन में कांग्रेस ने किसानों पर कपास टैक्स का खुलेआम विरोध करते हुए किसानों के हितों की बात की थी।

इस प्रकार अपने 10वें अधिवेशन तक जैसे-जैसे कांग्रेस संगठन पर भारतीयों का भरोसा बढ़ता गया, वैसे वैसे अंग्रेजी हुकूमत की मुश्किलें बढ़ती गयी। क्योंकि कांग्रेस उनकी एकता और आवाज का मंच बन रही थी। कांग्रेस अधिकांश का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि भारत के लोगों को अपने अधिकारों का आवाज उठाने वाला संगठन मिल गया, जो बाद में और बुलंद होता गया। प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे और राजेश गुप्ता ने बताया कि वीडियो श्रृंखला की आज दूसरी वीडियो झारखंड के कांग्रेस द्वारा शेयर किया गया। हजारों की संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं, विधायकों,सांसदों मंत्रियों, पदाधिकारियों ने इस वीडियो के माध्यम से युवा पीढ़ी को कांग्रेस के योगदान और किए गए कार्यों की जानकारी उपलब्ध करा रही है। वीडियो श्रृंखला की अभी और कई वीडियो जारी किए जाऐंगे और लोगों के बीच रखे जाएंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी वीडियो आज के युवा पीढ़ी के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है।

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