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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:51 · नई दिल्ली संस्करण

जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में 9 दिन पहले इलाज के लिए भर्ती हुए मरीज का शव बरामद, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में 9 दिन पहले इलाज के लिए भर्ती हुए मरीज का शव बरामद, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम में सोमवार देर रात उस वक्त सनसनी फैल गई, जब अस्पताल में इलाज के लिए 9 दिन पहले दाखिल हुए 50 वर्षीय मरीज सुनील यादव का शव अस्पताल परिसर से संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ।

शहर के बागबेड़ा इलाके के निवासी सुनील यादव अस्पताल में दाखिल होने के बाद अपने वार्ड से लापता हो गए थे। उनका सड़ा-गला शव लैब की बाउंड्री वॉल के पास कचरे के ढेर से बरामद किया गया है। मृतक के हाथ में अब भी इलाज के दौरान लगा 'कैनुला' मौजूद था, जो इस बात की पुष्टि करता है कि वे अस्पताल की कस्टडी से ही गायब हुए थे।

इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और प्रबंधन पर हत्या का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

परिजनों के अनुसार, सुनील यादव को कमजोरी की शिकायत के बाद 13 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 14 मार्च की रात तक वे वार्ड में मौजूद थे, लेकिन 15 मार्च की सुबह अचानक अपने बेड से गायब मिले। मृतक के बेटे अभय यादव के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में उनके पिता 14 मार्च की रात करीब 11 बजे अस्पताल के मुख्य गेट तक जाते दिखे थे, जिसके बाद उनका कोई सुराग नहीं मिला।

परिजनों का आरोप है कि पिछले 9 दिनों से वे अस्पताल प्रबंधन और पुलिस से गुहार लगा रहे थे, लेकिन किसी ने तत्परता नहीं दिखाई। सोमवार रात जब अस्पताल के एक कोने से तेज दुर्गंध आने लगी, तब जाकर इस वारदात का खुलासा हुआ। शव की स्थिति को देख ग्रामीणों और परिजनों का अंदेशा है कि यह 6-7 दिन पुराना है और इसे साजिश के तहत वहां फेंका गया है।

घटना की सूचना मिलते ही एमजीएम थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा, हालांकि पुलिस हत्या और लापरवाही दोनों ही बिंदुओं पर तफ्तीश कर रही है। इधर, इस बड़ी चूक के बाद अस्पताल प्रबंधन बैकफुट पर है और आनन-फानन में सुरक्षा के नए नियम लागू कर दिए गए हैं।

अब वार्ड की खिड़कियों में ग्रिल लगाने, स्लाइडर दरवाजों में लॉक की व्यवस्था करने और रात 9 बजे के बाद मरीजों के बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

अस्पताल प्रशासन ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि बिना परिजन वाले मरीजों को नर्स या अटेंडेंट की निगरानी में ही वॉशरूम भेजा जाएगा।

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