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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:44 · नई दिल्ली संस्करण

पीएम मोदी की ‘गिफ्ट डिप्लोमेसी’ में खास बनी भगवद गीता, कई राष्ट्राध्यक्षों को कर चुके हैं भेंट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पीएम मोदी की ‘गिफ्ट डिप्लोमेसी’ में खास बनी भगवद गीता, कई राष्ट्राध्यक्षों को कर चुके हैं भेंट

नई दिल्ली। कूटनीति से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा अक्सर उनकी 'गिफ्ट डिप्लोमेसी' के कारण चर्चित रही है। इसका हालिया उदाहरण उनकी रोम की यात्रा है, जहां उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को पार्ले की 'मेलोडी' टॉफी गिफ्ट की। पीएम मोदी के इस गिफ्ट की चर्चा हर जगह रही है। लेकिन याद रहे कि प्रधानमंत्री मोदी की 'गिफ्ट डिप्लोमेसी' में कई बार 'सांस्कृतिक कूटनीति' भी नजर आई है, जिसका सिलसिला 2014 से ही चला आ रहा है।

वैसे तो प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की सांस्कृतिक धरोहरों से दूसरे देश के लीडर्स को गिफ्ट के जरिए रूबरू कराया है, लेकिन उनकी 'सांस्कृतिक कूटनीति' में सबसे अहम 'श्रीमद्भगवद्गीता' (गीता) रही है, जिसे वह अलग-अलग अवसरों पर अलग-अलग राष्ट्राध्यक्षों को भेंट करते आए हैं।

सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि पीएम मोदी ने 'श्रीमद्भगवद्गीता' की किताब जिस भी राष्ट्राध्यक्ष को भेंट की है, वे उन्हीं के देश की भाषा में लिखित रही।

2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी अपने पहले अमेरिकी दौरे पर 'श्रीमद्भगवद्गीता' की प्रति लेकर गए थे, जो उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को गीता भेंट की थी।

उन्होंने व्हाइट हाउस में आयोजित रात्रिभोज के दौरान ओबामा को महात्मा गांधी की ओर से लिखित 'गीता' उपहार में दी थी।

जब प्रधानमंत्री मोदी 2014 में जापान यात्रा पर गए थे, तब भी वे सम्राट अकिहितो और प्रधानमंत्री शिंजो आबे के लिए 'श्रीमद्भगवद्गीता' की प्रतियां ले गए थे। यह प्रतियां जापानी भाषा में लिखी हुई थीं।

दिसंबर 2025 में जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत आना हुआ, तब भी प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें रूसी भाषा में लिखी हुई गीता की एक प्रति भेंट की। उस समय पीएम मोदी ने कहा था, "गीता के उपदेश विश्‍व भर के लाखों लोगों को प्रेरणा देते हैं।"

कई अवसरों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक और संदेशों को दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाने की कोशिश की है।

वे मानते हैं कि गीता के शब्द व्यक्तियों के मार्गदर्शन के साथ ही राष्ट्र की नीतियों की दिशा भी निर्धारित करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा था, "भगवद् गीता सिखाती है कि शांति और सत्य बनाए रखने के लिए अन्याय की शक्तियों का सामना करना और उन्हें समाप्त करना आवश्यक हो सकता है और यही सिद्धांत राष्ट्र की सुरक्षा के दृष्टिकोण में केंद्रित है।"

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