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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:36 · नई दिल्ली संस्करण

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार : कोलकाता में बांग्लादेशी उच्चायोग को ज्ञापन देंगे शुभेंदु

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार : कोलकाता में बांग्लादेशी उच्चायोग को ज्ञापन देंगे शुभेंदु

कोलकाता,। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हो रहे हिंसा के खिलाफ शुक्रवार को कोलकाता में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में साधु संतों का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमीशन को ज्ञापन देकर विरोध जताएगा ।अधिकारी ने बताया कि डिप्टी हाई कमीशन से मिलने का समय शुक्रवार शाम तय हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रतिनिधिमंडल में पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी का कोई भी राज्य स्तरीय नेता शामिल नहीं होगा। उनके साथ हिंदू संत समाज के पांच प्रतिनिधि रहेंगे। इनमें सर्वानंद अवधूत, महाकाल गिरी, संजय शास्त्री, संजय हेला और कृष्णा माताजी शामिल हैं।इससे पहले इसी सप्ताह शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन के सामने प्रदर्शन हुआ था। उस दिन उन्हें अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिली थी। तब उन्होंने ऐलान किया था कि वह शुक्रवार को विधिवत प्रतिनिधिमंडल के साथ आएंगे और यदि फिर भी प्रवेश नहीं मिला तो दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा। बाद में उन्होंने पुष्टि की कि डिप्टी हाई कमीशन से मिलने का समय तय हो गया है।शुभेंदु अधिकारी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल बांग्लादेश प्रशासन से यह जानना चाहता है कि मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की हत्या के बाद कार्यवाहक यूनुस सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। इसके साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई और पीड़ित परिवार को किस तरह की मदद दी गई।गौरतलब है कि दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या को लेकर पूरे देश में आक्रोश देखा गया। दिल्ली, कोलकाता, भोपाल और हैदराबाद सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। हिंदू संगठनों ने सड़कों पर उतरकर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचारों का विरोध किया।25 साल के दीपू चंद्र दास बांग्लादेश में एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करते थे। आरोप है कि एक सहकर्मी द्वारा उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाए जाने के बाद उग्र भीड़ ने फैक्ट्री में घुसकर उन्हें बाहर घसीटा, बेरहमी से पीटा और बाद में सरेआम पेड़ से बांधकर उनके शव को आग के हवाले कर दिया। इस घटना के बाद भारत में व्यापक विरोध और गुस्सा देखने को मिला।

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