परंपरा के खिलाफ रात में हुआ नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार, वजह जानकर भावुक हुए फैंस
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार 8 अक्टूबर को रात 11:28 बजे पुणे के फार्महाउस पर हुआ। सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार पर सवाल उठे तो बेटे मल्हार पाटेकर ने वजह बताई। उन्होंने कहा, परिवार और पार्थिव शरीर गोवा में था, पुणे लाने में समय लग गया। सुबह जल्दी निधन होने से काफी समय बीत चुका था, इसलिए शव को रखना ठीक नहीं था, मजबूरी में रात में ही अंतिम संस्कार करना पड़ा।

बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को 75 साल की उम्र में निधन हो गया, जिससे पूरी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार रात सूर्यास्त के बाद पुणे के डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस 'नानाची वाड़ी' में पूरे राजकीय सम्मान और 3 गन सैल्यूट के साथ किया गया। उन्हें बेटे मल्हार पाटेकर ने रात 11 बजकर 28 मिनट पर मुखाग्नि दी। हिंदू परंपरा में सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता, इसलिए सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे थे कि इतनी रात में अंतिम संस्कार क्यों किया गया और क्या किसी सेलिब्रिटी के इंतजार में देरी हुई। इस पर अब बेटे मल्हार ने चुप्पी तोड़ी है।
मल्हार ने मीडिया से कहा, "ऐसी कोई बात नहीं है। इतनी रात को क्यों और कल सुबह क्यों नहीं, ऐसा कुछ नहीं था। आज सुबह जल्दी ये हादसा हुआ। पहले ही काफी समय बीत चुका था। इसलिए हमने यह फैसला लिया कि आज ही करेंगे।" दरअसल नाना पाटेकर का निधन गोवा स्थित उनके घर पर कार्डियक अरेस्ट से हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक 8 अक्टूबर की रात 2:30 बजे से उनकी तबीयत खराब होने लगी, सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों ने 45 मिनट तक CPR देकर बचाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। मल्हार ने बताया कि परिवार उस वक्त गोवा में ही था और पार्थिव शरीर को पुणे के फार्महाउस तक लाने में लंबा समय लग गया।
उन्होंने स्पष्ट किया, "हम गोवा में थे और उनका पार्थिव शरीर गांव के फार्महाउस पर लाया जाना था। हमें उम्मीद थी कि हम जल्दी पहुंच जाएंगे लेकिन हमें कुछ समय लग गया। उनका निधन सुबह जल्दी हुआ था, इसलिए काफी समय बीत चुका था और पार्थिव शरीर को ज्यादा देर तक रखना ठीक नहीं था। इसलिए, हमें सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करना पड़ा।" पहले पार्थिव शरीर को गोवा मेडिकल कॉलेज के शवगृह में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था, जहां से एयर एंबुलेंस के जरिए उसे पुणे लाया गया। गोवा से पुणे आने में कागजी प्रक्रिया और यात्रा में देरी होने के कारण अंतिम संस्कार में रात हो गई।
अंतिम संस्कार के बाद मल्हार ने भावुक होकर कहा कि नाना साहेब जैसे लोग कभी हमें छोड़कर नहीं जाते, वे अपने काम के जरिए अमर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि पिता ने जाते-जाते सबको जिम्मेदारी सौंपी है। मल्हार ने कहा, "नाना साहब जैसा व्यक्ति कभी हमें छोड़कर जाता, वह अपने काम के जरिए हमेशा अमर रहेंगे। उनकी सोच हमेशा एक जैसी रही है - 'आइए मानवता के नाम पर एकजुट होकर दुनिया की भलाई के लिए काम करें।' हमारे ऑर्गेनाइजेशन के जरिए हम पानी के क्षेत्र में पहले से ही काम कर रहे थे। इसके अलावा हम कश्मीर में भी शिक्षा और स्वास्थ्य के फील्ड में बड़े स्केल पर काम कर रहे थे।" नाना पाटेकर ने पत्नी नीलकांति और बेटे मल्हार के अलावा NAM Foundation जैसी सामाजिक विरासत छोड़ी है, जिसे अब मल्हार आगे बढ़ाने का वादा कर रहे हैं।
विषय




