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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 10:42 · नई दिल्ली संस्करण

राष्ट्रीय पार्टियों की उपेक्षा से सूढ़ी समाज में बढ़ा आक्रोश, लोकसभा चुनाव में प्रतिनिधित्व नही मिलने से बढ़ी नाराजगी

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
राष्ट्रीय पार्टियों की उपेक्षा से सूढ़ी समाज में बढ़ा आक्रोश, लोकसभा चुनाव में प्रतिनिधित्व नही मिलने से बढ़ी नाराजगी

राष्ट्रीय पार्टियों की उपेक्षा से सूढ़ी समाज में बढ़ा आक्रोश, लोकसभा चुनाव में प्रतिनिधित्व नही मिलने से बढ़ी नाराजगी

रांची: झारखंड में सूढ़ी समाज के लोगों को लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय व क्षेत्रीय पार्टियों के द्वारा प्रतिनिधित्व करने का मौका अबतक नही दिया गया है। इससे सूढ़ी जाति के लोगों में काफी आक्रोश है। सूढ़ी समाज आज अपने आप को ठगा महसुस कर रहा है। झारखंड में सूढ़ी समाज की आबादी करीब 36 लाख है। झारखंड को अलग हुए 24 वर्ष हो चुका है। किंतु अभी तक इस जाति को राजनीतिक भागीदारी जनसंख्या के अनुपात के अनुसार नहीं मिला है। जिसके कारण 12 फीसदी आबादी वाले सूढ़ी जाति के लोग अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। चतरा ,हजारीबाग, धनबाद ,गिरिडीह, गोड्डा के अलावे रांची में भी काफी संख्या में सूढ़ी समाज के लोग रहते हैं। लोकसभा में प्रतिनिधित्व नही मिलने से झारखंड का एक बड़ा तबका नाराज और आहत है । समाज में इतनी बड़ी आबादी होने के कारण सूढ़ी समाज राजनीतिक दलों से अपेक्षा रखता है कि आबादी के अनुसार राजनीतिक भागीदारी मिले और सूढ़ी समाज को लोकसभा में प्रत्याशी बनाए। चाहे देश की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी की बात हो या कांग्रेस पार्टी की बात हो या फिर क्षेत्रीय पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा , आजसू या वैसे तमाम राजनीति पार्टियां जो झारखंड में सक्रिय तौर पर राजनीति करती है। सभी राजनीति पार्टियों में इस समाज को राजनीतिक अधिकार के नाम पर ठगने या छलने का किया है। भाजपा ने झारखंड लोकसभा के 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी है जिसमें एक भी सूढ़ी जाति का नाम शामिल नही है। वहीं होली के बाद कांग्रेस पार्टी अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगी। सूढ़ी जाति के लोगों को उम्मीद है कि शायद कांग्रेस पार्टी इनके उम्मीदों पर खरा उतरे।

स्व.शिव प्रसाद साहू,सुरज मंडल जैसे कदावर नेताओं ने सुयुक्त बिहार के समय किया था प्रतिनिधित्व, लोहरदगा रेल लाइन स्व.साहू की देन

पूर्व सांसद स्व. शिव प्रसाद साहू ने संयुक्त बिहार के समय कांग्रेस पार्टी से लोकसभा में दो बार रांची से बिहार का प्रतिनिधित्व किया था। 1980-84 और 1984-89 तक सांसद रहे। आज भी लोहरदगा रेल लाइन की बात होती है तो स्व. शिव प्रसाद साहू का नाम लोग लेते हैं। उस वक्त लोहरदगा रेल लाइन की कल्पना और सोच उन्ही की देन है। वहीं सुरज मंडल 10 वीं लोकसभा के सदस्य बने । 1991 में झारखंड मुक्ति मोचा के सदस्य के रुप में भारतीय जनता पार्टी के नेता जनार्दन यादव को हराकर गोड्डा से लोकसभा के लिए चुने गए। सांसद शिव प्रसाद साहू के छोटे भाई धीरज साहू ने भी झारखंड का प्रतिनिधित्व किया। वही वर्तमान में बीजेपी से राज्य सभा सांसद आदित्य साहू समाज वह क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसके अलाव विधानसभा में वर्तमान में गोड्डा के विधायक अमित मंडल समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे है। विधायक अमित मंडल के पिता रघुनंदन मंडल और उनके दादा सुमृत मंडल भी विधायक थे। वही फूलचंद मंडल भी विधायक रहे और अपने क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधित्व किया।

प्राथमिकता उसी दल को दिया जायेगा जो सूढ़ी समाज को प्रतिनिधित्व का मौका देगा: अशोक कुमार प्रसाद

झारखंड प्रदेश सूढ़ी समाज के अशोक कुमार प्रसाद ने कहा कि आज सूढ़ी समाज भीड़ तंत्र का हिस्सा बनकर रह गया है। इसी कारण से राजनीतिक क्षेत्र में इस समाज की उपेक्षा होने लगी है। अब सूढ़ी समाज को चिंतन करना होगा और शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से सभी दलों को सबक सिखाने के लिए सड़क पर उतरने की जरुरत है। अब समाज खामोश नही रहेगा। इसबार चुनाव में ठोस निर्णय लेने के लिए बाध्य होगा। अगर जरुरत पड़ी तो वोट वहिष्कार भी किया जा सकता है। अभी भी समय है राजनीतिक दल जनसंख्या के अनुपात में भागीदारी सुनिश्चत करे अन्यथा बाध्य होकर ठोस निर्णय लिए जायेंगे।

सूढ़ी समाज को प्रतिनिधित्व नहीं मिलना समझ से परे: विनय कुमार लाल

झारखंड के कदावर नेता सह प्रदेश सूढ़ी समाज के विनय कुमार लाल ने बताया कि झारखंड में हमारी आबादी 36 लाख के करीब है बावजूद झारखंड के राजनीतिक पार्टियों द्वारा लोकसभा में प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाना समझ से परे है। राजनीतिक पार्टियों को यह सोचना चाहिए की जहा हमारी आबादी अधिक है वहां मौका दिया जाय । सूढ़ी समाज में कई संगठन है जिसके कारण राजनीतिक दल यह समझ बैठते है की समाज मे बिखराव है जबकि ऐसा नहीं है। अब समय आ गया है की सभी को एकजुटता का परिचय देकर एक मंच पर आना होगा ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में हमारा भी प्रतिनिधित्व हो और राजनीतिक पार्टियां विवश होकर मौका दे।

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