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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:55 · नई दिल्ली संस्करण

‘चौकीदार चोर है’ मामले में राहुल गांधी को बॉम्बे HC से मिला झटका, याचिका खारिज, चलेगी आपराधिक मानहानि की कार्यवाही

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
‘चौकीदार चोर है’ मामले में राहुल गांधी को बॉम्बे HC से मिला झटका, याचिका खारिज, चलेगी आपराधिक मानहानि की कार्यवाही

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर है’ बयान से जुड़े एक आपराधिक मानहानि के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनके खिलाफ जारी समन और शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति एन.जे. जमादार की एकल पीठ ने सुनाया। यह मामला 2018 में राजस्थान में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणी से जुड़ा है। राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने तात्कालीन राजनीतिक संदर्भ में ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दिया था।

इसके बाद, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने मुंबई की एक निचली अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इस बयान से न केवल देश के शीर्ष नेतृत्व बल्कि पार्टी और कार्यकर्ताओं की छवि भी धूमिल हुई है। मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया था। राहुल गांधी ने इस समन और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद अब मुंबई की निचली अदालत में उनके खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला राहुल गांधी के लिए एक कानूनी अड़चन माना जा रहा है। भारतीय न्याय संहिता और मानहानि कानूनों के तहत, यदि निचली अदालत में उनके खिलाफ आरोप साबित होते हैं, तो उन्हें सजा या जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। राजनीतिक दृष्टिकोण से, बीजेपी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए और बिना सबूतों के संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। वहीं, कांग्रेस कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है और इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की संभावना तलाशी जा रही है। यह मामला एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि चुनावी भाषणों और राजनीतिक बयानों में कानूनी जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण है।

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