दिल्ली ट्रैजेडी और 'दिमागी नक्सल' बयान पर राहुल गांधी का पलटवार: बोले- जवाबदेही से बचने के लिए बीजेपी

पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए दिमागी नक्सलियों वाले भाषण के कीरब तीन हफ्ते बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को उन पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं और जवाबदेही से बचने के लिए ऐसे विवादास्पद शब्दों का सहारा लेती है। उन्होंने विशेष रूप से दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे का हवाला दिया, जिसमें एक बहुमंजिला इमारत ढहने से सात लोगों की जान चली गई। राहुल गांधी ने एक्स पर ये बातें कहीं। उन्होंने टिना हैशटैग का इस्तेमाल किया, जिसका मतलब है उन्होंने कोई जवाबदेही नहीं बताया।
गौरतलब है कि पीएम मोदी के समर्थक टिना फ़ैक्टर का ज़िक्र करते हैं, जिसका मतलब वे कोई विकल्प नहीं बताते हैं। यह पहली बार है जब राहुल गांधी ने पीएम मोदी के दिमागी नक्सल वाले तंज का जवाब दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार से सवाल पूछने वाले किसी भी व्यक्ति को दिमागी नक्सल कह देती है। सोमवार को हिंदी में किए गए अपने एक्स पोस्ट में राहुल ने कहा कि बीजेपी हमेशा निचले स्तर के अधिकारियों को दोषी ठहराती है और असली दोषियों को बच निकलने देती है, साथ ही, वह त्रासदी को रोकने के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाती।
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली की सत्य निकेतन त्रासदी कोई अकेली घटना नहीं है और पिछले चार महीनों में राजधानी में ऐसे कई मामले सामने आए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि पिछले चार महीनों में सैदुलजाब में इसी तरह की त्रासदी में छह लोगों की मौत हुई और हौज़ रानी में आग लगने से 22 लोगों की जान चली गई थी। हर बार, लोगों की जान, सपने और उम्मीदें मलबे के नीचे दब जाती हैं और हर बार, कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिलती। उन्होंने आगे कहा कि और जब आप जवाबदेही की मांग करते हैं, तो पीएम खुद आप पर दिमागी नक्सल और नाराज़ फूफा जैसे अपमानजनक लेबल लगाते हैं।
मकसद यह होता है कि सवाल पूछने की हिम्मत करने वाले किसी भी व्यक्ति को शर्मिंदा किया जाए, बदनाम किया जाए और चुप करा दिया जाए। राहुल ने कहा कि दिल्ली में ट्रिपल-इंजन सरकार है, इसलिए इस घटना की जिम्मेदारी लेने से बचने के लिए उसके पास कोई बहाना नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यह बेबसी इच्छाशक्ति की कमी से पैदा होती है क्योंकि जहां इच्छाशक्ति नहीं होती, वहां जवाबदेही भी नहीं होता।





