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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:56 · नई दिल्ली संस्करण

यूपी के किसानों को राहत: गेहूं खरीद के नियमों में ढील, बिना रजिस्ट्रेशन के सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
यूपी के किसानों को राहत: गेहूं खरीद के नियमों में ढील, बिना रजिस्ट्रेशन के सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को किसानों को बड़ी राहत दी है। अब गेहूं उत्पादक किसान बिना रजिस्ट्रेशन के ही सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी फसल बेच सकेंगे। सरकार के इस कदम को किसानों के एक बड़े तबके के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि इससे अपनी फसलों को बेचने के लिए सरकारी केंद्रों पर पहले खुद को रजिस्टर करवाने की मौजूदा शर्त खत्म हो गई है।

अधिकारियों के मुताबिक, किसानों को योग्य होने के लिए अब 'फार्म रजिस्ट्री' की जरूरत नहीं होगी और वे नई खरीद व्यवस्था लागू होने से पहले की तरह ही अपनी फसलें बेच सकेंगे। पूरे राज्य के जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इन निर्देशों को तुरंत प्रभाव से लागू करें और सभी के लिए "आसान खरीद" सुनिश्चित करें।

यह फैसला जाहिर तौर पर किसानों को होने वाली असुविधाओं और परेशानियों की कई रिपोर्टें सामने आने के बाद लिया गया है।

इस निर्देश से उन किसानों और गांवों को सबसे अधिक फायदा होने की उम्मीद है, जहां 'चकबंदी' चल रही है। इनमें से कई किसान अपने-अपने ग्राम पंचायतों में चल रही इस प्रक्रिया की वजह से अपने 'किसान रजिस्ट्री' सर्टिफिकेट हासिल नहीं कर पाए थे।

पाबंदियों के चलते किसान अपनी गेहूं की पैदावार सरकारी केंद्रों तक नहीं पहुंचा पाए और उन्हें अपनी फसल बिचौलियों को बहुत कम कीमतों पर बेचने पर मजबूर होना पड़ा, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई। जैसे ही कई किसानों ने अपना गुस्सा जाहिर किया, प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए नियमों में ढील देने की घोषणा की।

इसके तहत खास तौर पर 'चकबंदी' से प्रभावित किसानों को गेहूं खरीद की पुरानी व्यवस्था का ही पालन करने की अनुमति दी गई।

गेहूं उत्पादक किसानों को दी गई इस 'छूट' का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए दर-दर भटकना न पड़े और उन्हें अपनी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य पाने के मामले में पंजीकृत किसानों के बराबर ही दर्जा मिले।

राज्य सरकार द्वारा नियमों में ढील दिए जाने के बाद अब किसानों के पास यह सुविधा होगी कि वे अपनी पैदावार सरकारी खरीद केंद्रों तक ले जा सकें और ऐसा करते हुए वे पहले से तय प्रक्रिया का पालन कर सकें। इसके साथ ही अपनी कृषि उपज का सही दाम हासिल कर सकें।

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