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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:22 · नई दिल्ली संस्करण

दलमा के जंगलों में मांसाहारी पौधों की दुर्लभ खोज

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
दलमा के जंगलों में मांसाहारी पौधों की दुर्लभ खोज

पूर्वी सिंहभूम। पूर्वी सिंहभूम जिले का प्रसिद्ध दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता को लेकर चर्चा में है। इस बार दलमा के घने जंगलों और आर्द्र क्षेत्रों में दुर्लभ मांसाहारी पौधों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जिसे वन विभाग और शोध जगत के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह खोज न केवल दलमा के पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि यहां का प्राकृतिक वातावरण आज भी काफी हद तक संरक्षित और संतुलित है।वन विभाग से जुड़े फॉरेस्ट गार्ड और शोधार्थी राजा घोष की ओर से किए गए अध्ययन में दलमा क्षेत्र में दो प्रमुख मांसाहारी पौधों की पहचान हुई है। पटमदा क्षेत्र में ‘ड्रोसेरा बर्मानी’ नामक पौधा पाया गया है, जिसे आमतौर पर ‘सनड्यू’ के नाम से जाना जाता है। यह पौधा अपनी पत्तियों पर मौजूद चिपचिपी बूंदों के जरिए छोटे कीटों को आकर्षित करता है और उन्हें फंसाकर उनसे पोषण प्राप्त करता है। वहीं, बालीगुमा और कोंकादाशा जैसे नमी और जलयुक्त क्षेत्रों में ‘यूटिकुलेरिया’ प्रजाति की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह पौधा अत्यंत सूक्ष्म जीवों और कीटों को अपने भीतर मौजूद ब्लैडर जैसी संरचना में कैद कर उनका शिकार करता है।विशेषज्ञों के अनुसार मांसाहारी पौधे आमतौर पर उन स्थानों पर उगते हैं, जहां मिट्टी में नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्वों की कमी होती है। अपनी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए ये पौधे कीटों और सूक्ष्म जीवों पर निर्भर रहते हैं। दलमा जैसे पुराने और प्राकृतिक रूप से विकसित वन क्षेत्र में इन पौधों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि यहां का इको-सिस्टम लंबे समय से बिना ज्यादा मानवीय हस्तक्षेप के फल-फूल रहा है।इस खोज को गंभीरता से लेते हुए राजा घोष ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट वरीय वन अधिकारियों को सौंप दी है। इसके बाद वन विभाग ने उन क्षेत्रों को चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जहां ये दुर्लभ पौधे पाए गए हैं। विभाग की योजना है कि इन स्थानों पर अनावश्यक मानवीय गतिविधियों को सीमित किया जाए, ताकि पौधों का प्राकृतिक आवास सुरक्षित रह सके। इसके साथ ही इन प्रजातियों के संरक्षण और अध्ययन के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर भी विचार किया जा रहा है।वन अधिकारियों का कहना है कि मांसाहारी पौधे केवल वनस्पति दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि वे कीटों की आबादी को नियंत्रित कर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इनकी मौजूदगी से दलमा के जंगलों का पारिस्थितिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।दुर्लभ पौधों की इस खोज के बाद दलमा अब सिर्फ वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए ही नहीं, बल्कि वनस्पति विज्ञान के शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और पर्यावरणविदों के लिए भी आकर्षण का एक नया केंद्र बनता जा रहा है।

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