राहुल का 'युवा अवतार': सिफारिशी चिट्ठियों का अंत, बुजुर्ग नेताओं की विदाई, 'रिपोर्ट कार्ड' से तय होगा युवा नेतृत्व

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस संगठन को फिर से खड़ा करने और युवाओं को आगे लाने की कवायद शुरू कर दी है। कांग्रेस को 'ड्रॉइंग रूम पॉलिटिक्स' में लगे बुजुर्ग नेताओं के चंगुल से निकालकर एक युवा, आक्रामक और ज़मीनी स्तर पर लड़ने वाले संगठन में बदलने की योजना पर काम शुरू हो गया है। कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर के संगठनात्मक पदों पर नियुक्ति के लिए अब राजनीतिक वरिष्ठता के बजाय काम के रिकॉर्ड और ज़मीनी स्तर पर की गई गतिविधियों को मुख्य आधार माना जा रहा है।
संगठन को और अधिक समावेशी और गतिशील बनाने के लिए, पार्टी नेतृत्व ने नए राष्ट्रीय सचिवों को शामिल करने के लिए साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू की है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल के साथ मिलकर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए साक्षात्कार ले रहे हैं। संगठन के भीतर एक नई, पेशेवर और वैचारिक रूप से मजबूत युवा नेतृत्व तैयार करने के लिए देश भर के विभिन्न राज्यों से चुने गए नेताओं को दिल्ली बुलाया गया है। सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए 30 नेताओं का इंटरव्यू लिया। रायबरेली के दो दिन के दौरे से राहुल गांधी के लौटने के बाद इंटरव्यू की प्रक्रिया फिर से शुरू होगी।
यह कदम सिर्फ़ संगठन में बदलाव नहीं है, बल्कि पार्टी में नई ऊर्जा भरने और मज़बूत युवा नेतृत्व तैयार करने की एक सोची-समझी कोशिश है। राष्ट्रीय सचिव पद के उम्मीदवारों का इंटरव्यू 10-10 के ग्रुप में किया जा रहा है। राहुल गांधी नेताओं से उनके पिछले काम से लेकर उनकी प्रोफ़ाइल तक से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं। इंटरव्यू देने वाले उम्मीदवारों के काम का पूरा रिपोर्ट कार्ड पहले से ही राहुल गांधी के पास मौजूद है। कांग्रेस ने अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके लिए राहुल गांधी पार्टी के भीतर अपनी नई टीम बना रहे हैं। इसीलिए राहुल गांधी खुद आखिरी इंटरव्यू ले रहे हैं। राहुल गांधी शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों से उनके काम की विस्तृत रिपोर्ट के साथ मिल रहे हैं।
उनका मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि फैसले सिर्फ सिफारिशों या रेफरल लेटर के आधार पर न हों, बल्कि युवाओं को ज़मीनी हकीकत, काम करने की क्षमता और विज़न के आधार पर पद मिलें। कांग्रेस अपने मौजूदा 60 प्रतिशत से ज़्यादा सचिवों को बदलने की तैयारी कर रही है और संगठन में नए चेहरों को मौका देने की योजना बना रही है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए कुल 120 नेताओं का इंटरव्यू लिया जाएगा, जिसके बाद पार्टी उनकी नियुक्तियों को अंतिम रूप देगी। उन नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है जिन्होंने पहले कांग्रेस के 'संगठन सृजन' (संगठन निर्माण) कार्यक्रम के तहत ऑब्ज़र्वर के तौर पर काम किया है।
जब से राहुल गांधी ने 2004 में राजनीति में कदम रखा है, कांग्रेस पार्टी का पुनर्गठन और "पीढ़ीगत बदलाव" उनका सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रहा है। उन्होंने कांग्रेस में युवाओं को आगे बढ़ाने और पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव लाने की कई कोशिशें की हैं। कांग्रेस ने पहले यूथ कांग्रेस और NSUI में नियुक्तियों के लिए इंटरव्यू-आधारित प्रक्रिया भी अपनाई थी। इससे प्रतिभा-आधारित चयन प्रक्रिया को बढ़ावा मिला, जिससे बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले युवा भी नेतृत्व की भूमिकाओं तक पहुंच सके। हालांकि, राहुल गांधी का यह राजनीतिक प्रयोग शुरू में पार्टी के पुराने नेताओं के कड़े विरोध और आंतरिक मतभेदों के कारण सफल नहीं हो सका।
फिर भी, पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के भीतर उठाए गए कदमों और देखे गए बदलावों से बदलते हालात का संकेत मिलता है। वरिष्ठ नेताओं की जगह नए चेहरों को आगे लाकर कांग्रेस ने एक राजनीतिक संदेश दिया है। संगठनात्मक बदलाव शुरू हो चुके हैं और अब नए चेहरे सामने आ रहे हैं। राज्य स्तर के संगठनों से लेकर ज़िला इकाइयों तक युवा चेहरों को नियुक्त किया जा रहा है। इससे साफ़ पता चलता है कि राहुल गांधी का दो दशक पुराना सपना अब सच हो रहा है। इसी क्रम में, राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति के लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसके ज़रिए उन कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है जो लंबे समय से ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे हैं, ताकि मेहनती युवाओं का राजनीति में भरोसा बना रहे।
कांग्रेस की योजना देश के हर कोने और समाज के हर वर्ग के युवाओं को मौक़ा देकर एक समावेशी टीम बनाने की है। राहुल गांधी का यह प्रयोग बताता है कि भविष्य की राजनीति की दिशा वे लोग तय कर सकते हैं जिनमें नया नज़रिया, ऊर्जा और जनसेवा का जज़्बा हो। राष्ट्रीय सचिवों के लिए यह चयन प्रक्रिया न केवल संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश है, बल्कि देश के उन सभी युवाओं के लिए उम्मीद का संदेश भी है जो राजनीति को बदलाव का ज़रिया मानते हैं।





