मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:23 · नई दिल्ली संस्करण

लोकसभा चुनाव : पुरुलिया- जनजातीय बहुल इलाके में मजबूत है भाजपा, तृणमूल से सीधी टक्कर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

कोलकाता। पश्चिम बंगाल का पुरुलिया लोकसभा क्षेत्र खास तौर पर

जनजातीय बहुल क्षेत्र है। यहां तृणमूल और भाजपा के बीच सीधे मुकाबले के

आसार हैं। वामदलों या कांग्रेस की ओर से फिलहाल यहां उम्मीदवार का ऐलान

नहीं किया गया है। भाजपा ने यहां से मौजूदा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो को

दोबारा टिकट दिया है। वह जोरदार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। सत्तारूढ़ पार्टी

तृणमूल कांग्रेस ने उनके खिलाफ शांति राम महतो को चुनावी मैदान में उतारा

है। सीधी लड़ाई इन्हीं दोनों के बीच दिख रही है, इसलिए शांतिराम महतो और

ज्योतिर्मय सिंह महतो पर क्षेत्र के विकास की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं

जबकि ज्योतिर्मय सिंह सत्तारूढ़ पार्टी पर केंद्रीय फंड के गबन का आरोप मढ़

रहे हैं।

क्या है राजनीतिक इतिहास

पुरुलिया शहर कासल नदी के उत्तरी छोर पर बसा हुआ है। यह अपने लैंडस्केप के

लिए जाना जाता है। पुरुलिया जिले का मुख्यालय पुरुलिया ही है। यहां की

साक्षरता दर 65 फीसदी है। 1995 में यहां हवाई जहाज से हथियार गिराये गए थे,

जिसके बाद यह इलाका दुनिया भर में चर्चित हो गया।

इस सीट

का मिजाज अलग रहा है। यहां से कांग्रेस को तो एकबार जीत मिली लेकिन माकपा

को यहां कभी जीत नसीब नहीं हुई। यहां से फॉरवर्ड ब्लॉक और ऑल इंडिया

फॉरवर्ड ब्लॉक विजयी होते रहे हैं। 1957 में पुरुलिया से आईएनडी के विभूति

भूषण दास गुप्ता सांसद चुने गए थे। उन्होंने कांग्रेस के महतो नागेंद्र नाथ

सिंह देव को हराया था। 1962 में लोकसेवक संघ के भजाहारी महतो सांसद चुने

गए थे। 1967 में आएनडी के बी. महतो सांसद चुने गए। 1971 में पहली बार यहां

से कांग्रेस को सफलता मिली और देबेंद्र नाथ महतो यहां से सांसद चुने गए थे।

1977

में एफबीएल के चितरंजन महतो को सफलता मिली थी। चितरंजन 1980, 1984 और 1989

तक पुरुलिया से लगातार सांसद चुने जाते रहे। 1991 में यहां पर उप चुनाव

हुआ, जिसमें फॉरवर्ड ब्लॉक (एफबीएल) के बी महतो सांसद चुने गए लेकिन 1991

में ही फॉरवर्ड ब्लॉक के चितरंजन महतो को फिर से जीत मिल गई। 1996, 1998,

1999 में फॉरवर्ड ब्लॉक के बीर सिंह महतो यहां से सांसद चुने जाते रहे।

इसके बाद फॉरवर्ड ब्लॉक में विभाजन हो गया और 2004 में बीर सिंह महतो ने ऑल

इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक से ताल ठोंकी और सांसद बने। 2006 के उपचुनाव में ऑल

इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के नरहरि महतो विजयी हुए थे। 2009 में एआईएफबी के

नरहरि महतो ही सांसद चुने गए। 2014 में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने यह

सीट कम्युनिस्टों से छीन ली और एआईटीसी के डॉक्टर मृगांका महतो यहां से

जीते थे।

क्या है 2019 का जनाद

बीजेपी के ज्योतिर्मय सिंह

भाजपा के ज्योतिर्मय सिंह महतो छह लाख 68 हजार 107 वोट हासिल कर जीते थे।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें