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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 10:42 · नई दिल्ली संस्करण

मध्य पूर्व तनाव के बीच पीएम मोदी का यूएई दौरा, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा मजबूती

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
मध्य पूर्व तनाव के बीच पीएम मोदी का यूएई दौरा, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा मजबूती

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) यात्रा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रही। इस दौरान भारत और यूएई के बीच ऊर्जा क्षेत्र में कई अहम समझौते ऐसे समय में हुए जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह लंबे समय के लिए अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है। मध्य पूर्व में बढ़ती अनिश्चितता को देखते हुए यह कदम और भी महत्वपूर्ण हो गया।

यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच देशों के दौरे का पहला चरण था। इसके बाद वे नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पर निकले।

इस दौरे का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में यूएई ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से बाहर निकलने का फैसला किया था।

ससे अब यूएई अपनी उत्पादन सीमा से बाहर जाकर अधिक तेल उत्पादन कर सकता है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग दसवां हिस्सा यूएई से आयात करता है और वह यूएई का सबसे बड़ा एलएनजी ग्राहक भी है। ऐसे में बढ़ा हुआ उत्पादन भारत के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भारत और यूएई के बीच इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के बीच एक रणनीतिक समझौता हुआ है, जिसके तहत यूएई भारत के रणनीतिक तेल भंडार के लिए 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल उपलब्ध कराएगा।

इसके अलावा, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और एडीएनओसी के बीच एलपीजी की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए भी समझौता हुआ है।

दोनों देशों ने भारत में गैस के रणनीतिक भंडार स्थापित करने की संभावना पर भी सहमति जताई है, ताकि भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत की जा सके।

यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर के नए निवेश की भी प्रतिबद्धता जताई है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सालाना लगभग 85 अरब डॉलर का व्यापार होता है।

यह समझौते ऐसे समय में हुए हैं जब क्षेत्र में अस्थिरता जारी है।

रविवार को यूएई और सऊदी अरब में ड्रोन हमलों की खबरों ने खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा संरचना की संवेदनशीलता को फिर उजागर किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूएई साझेदारी भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार में संभावित आपूर्ति संकट और कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।

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