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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:15 · नई दिल्ली संस्करण

नामकुम जमीन प्रकरण में एसीबी जांच का रास्ता साफ, पीई को मिली अनुमति

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
नामकुम जमीन प्रकरण में एसीबी जांच का रास्ता साफ, पीई को मिली अनुमति

रांची। रांची जिले के नामकुम अंचल में जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में अनियमितताओं और राजस्व अभिलेखों के गायब होने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की प्रारंभिक जांच (प्रिलिमिनरी इंक्वायरी-पीई) का रास्ता साफ हो गया है। राज्य के कैबिनेट सचिव ने मामले में पीई दर्ज करने की अनुमति दे दी है। इसकी जानकारी गुरुवार को झारखंड सरकार की ओर से उच्च न्यायालय को दी गई।

मामले की सुनवाई झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत में हुई। अदालत ने एसीबी को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच दर्ज कर मामले की प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त की तिथि निर्धारित की गई है।

सुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जे.जे. सांगा ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं।

इससे पहले हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय ने कैबिनेट सचिव को निर्देश दिया था कि एक सप्ताह के भीतर एसीबी को प्रारंभिक जांच दर्ज करने की अनुमति दी जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि समय पर अनुमति नहीं दी गई तो न्यायालय इस मामले को गंभीरता से लेगा। साथ ही कैबिनेट सचिव को इस संबंध में शपथ-पत्र दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया था।

यह मामला नामकुम अंचल कार्यालय में राजस्व अभिलेखों के गायब होने और विवादित भूमि के म्यूटेशन में अनियमितताओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ता थॉमस साइमन ने उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि नामकुम अंचल के डुंडु क्षेत्र स्थित विवादित जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां की गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार मांग करने के बावजूद जांच के लिए आवश्यक मूल राजस्व अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए।

मामले की पिछली सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य भी आया था कि अंचल कार्यालय दूसरे पक्ष के पक्ष में किए गए म्यूटेशन की प्रमाणित प्रति (सर्टिफाइड कॉपी) उपलब्ध कराने में लगातार टालमटोल कर रहा था। जबकि उच्च न्यायालय पहले ही संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का स्पष्ट आदेश दे चुका था। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किए जाने पर अदालत ने नाराजगी भी जताई थी।

उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया सरकारी रिकॉर्ड में संभावित छेड़छाड़ और अनियमितताओं को अत्यंत गंभीर मानते हुए मामले की जांच एसीबी को सौंपने का निर्णय लिया। अब एसीबी प्रारंभिक जांच के दौरान राजस्व अभिलेखों के गायब होने, म्यूटेशन प्रक्रिया में अनियमितताओं तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी।

प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद एसीबी अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई और नियमित प्राथमिकी दर्ज करने सहित अन्य आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।

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