एक लाख करोड़ रुपये की वित्तपोषण सुविधा का शुभारंभ, किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा के समान : कांग्रेस
रांची। झारखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राकेश किरण महतो ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘कृषि अवसंरचना कोष’ के तहत मात्र एक लाख करोड़ रुपये की वित्तपोषण सुविधा का शुभारंभ किया जाना हिंदुस्तान के किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। उन्होंने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण पूरे देश में आज किसानों की हालत सबसे खराब है। लेकिन सरकार को इनकी समस्या के समाधान के लिए जिस स्तर की पहल करनी चाहिए थी, वह नहीं की जा रही है। इसमें संशय है कि प्रधानमंत्री द्वारा कल जितनी भी योजनाओं का शुभारंभ किया गया, वे शायद ही धरातल पर उतर पाएं। क्योंकि इससे पहले भी देश के युवाओं को हर साल दो करोड़ नौकरियां देने और भारत को भ्रष्टाचार और महंगाई से मुक्त करने का वादा किया गया था। लेकिन जब उन वादों को अमलीजामा पहनाने का मौका जनता ने दिया तो उन्हें जुमले घोषित कर दरकिनार कर दिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी कर देने का भी वादा किया था। अब उस घोषणा को चार साल पूरे हो चुके हैं और मात्र दो साल ही बचे हैं। अब देश की जनता जानना चाहती है कि चार साल में किसान की आमदनी कहां तक पहुंची है। सरकार को बताना चाहिए क्या वह अपने इस वादे पर कायम है। कृषि अर्थव्यवस्था में देखें तो किसान बेहाल है, आत्महत्याओं का दौर थम ही नहीं रहा है। आंकड़े छुपाए जा रहे हैं। पहले जो राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो आंकड़े देता था और हर राज्य के किसान की आत्महत्याओं के आंकड़े मिलते थे, आज उन आंकड़ों को तोड़-मरोड़ करके पेश किया जा रहा है। लेकिन सभी जानते हैं कि देश में किसान की हालत क्या है। सरकार की कथनी और करनी में बड़ा फर्क पेट्रोल और डीजल के दामों में की गई वृद्धि से भी दिखता है। डीजल और पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए, लेकिन सरकार जानबूझकर आम आदमी से और विशेषकर किसानों से टैक्स वसूलना चाहती है। एक अनुमान है की एनडीए सरकार के आने के बाद पिछले पांच साल में अकेली केंद्र सरकार ने 13 लाख 50 करोड़ रूपया टैक्स के रूप में वसूले हैं सिर्फ पेट्रोल-डीजल से। जिसका बहुत सारा हिस्सा किसान और किसान का माल ढोने वाली जो परिवहन व्यवस्था है वह देते हैं जबकि पूर्व की यूपीए सरकार पेट्रोल-डीजल पर भारी सब्सिडी देती थी ताकि किसानों को महंगी कीमतें ना सहनी पड़े। विशेषकर तब जब कांग्रेस पार्टी लगातार इस मुद्दों को उठा रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बहुत कम हो चुकी हैं। आज भारत में किसानों की हालत बेहद खराब है और जो आत्महत्याएं हो रही हैं उसका एक बड़ा कारण है कि किसान को कृषि उपज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। इस दिशा में मोदी सरकार के द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। इस सरकार के द्वारा फसल बीमा योजना को भी पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया गया है।





