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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:42 · नई दिल्ली संस्करण

निशिकांत दुबे ने दी यूएस ट्रेड डील और कपास किसानों पर 'झूठी कहानी' फैलाने के लिए राहुल गांधी को बहस की चुनौती

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
निशिकांत दुबे ने दी यूएस ट्रेड डील और कपास किसानों पर 'झूठी कहानी' फैलाने के लिए राहुल गांधी को बहस की चुनौती

नई दिल्ली/ गोड्डा। भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे ने शनिवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी को खुली बहस की चुनौती दी है।

उन्होंने राहुल पर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों, कपास आयात, कपड़ा निर्यात और किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में झूठ फैलाने का आरोप लगाया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर राहुल गांधी के एक वीडियो पोस्ट का जवाब देते हुए दुबे ने तीखा हमला किया। राहुल ने दावा किया था कि मोदी सरकार भारतीय कपड़ों पर अमेरिका में 18 प्रतिशत शुल्क लगाया जा रहा है, जबकि बांग्लादेश के लिए यह शर्त के साथ शून्य प्रतिशत है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा था कि केंद्र सरकार देश को गुमराह कर रही है।

निशिकांत दुबे ने इस पर मुख्य तथ्यों पर सवाल उठाए, भारत के कपड़ा उद्योग के लिए अमेरिकी कपास के आयात की वास्तविक आवश्यकता और उसकी मात्रा को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि देश में कपास का कुल उत्पादन कितना है और आयात की जरूरत किन परिस्थितियों में पड़ती है।

दुबे ने भारतीय कपास किसानों की मौजूदा स्थिति, कपड़ा मिलों की आर्थिक स्थिति और घरेलू उत्पादन बनाम आयात के संतुलन पर भी प्रश्न खड़े किए। उनका कहना है कि इन विषयों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, न कि राजनीतिक कथाओं के आधार पर।

इसी क्रम में निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका और कथित विदेशी समर्थन से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जॉर्ज सोरोस जैसे विदेशी व्यक्तियों के समर्थन से जुड़े कथित नक्सली आंदोलन और राहुल गांधी के बयानों के बीच संबंधों की जांच होनी चाहिए।

दुबे ने कहा कि यह पूरा प्रकरण “एक बड़ा झूठ” है और वह इस विषय पर किसी भी मंच पर सार्वजनिक बहस के लिए तैयार हैं।

यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब संसद के भीतर राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। निशिकांत दुबे ने हाल ही में लोकसभा में राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने 1978 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय इसी तरह की मांग के आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को संसद की सदस्यता से हटाया गया था।

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