MLC चुनाव में EVM बैन क्यों? बैलेट पेपर के पीछे छुपा है ये बड़ा सिस्टम
MLC चुनाव आम चुनाव जैसा नहीं है। इसमें वोटर आम जनता नहीं, बल्कि शिक्षक, स्नातक और जनप्रतिनिधि होते हैं। यहाँ वोटिंग Single Transferable Vote System से होती है। मतदाता को बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों को वरीयता देनी होती है - 1, 2, 3, 4... EVM में सिर्फ एक बटन दबाकर एक वोट देने की सुविधा है, वह वरीयता वोट नहीं गिन सकता। साथ ही जीत के लिए 50%+1 कोटा और दूसरी पसंद के वोट ट्रांसफर करने की जटिल प्रक्रिया भी EVM नहीं कर सकता, इसलिए बैलेट पेपर जरूरी है।

अक्सर लोग पूछते हैं कि जब लोकसभा और विधानसभा चुनाव EVM से होते हैं तो फिर MLC यानी विधान परिषद का चुनाव बैलेट पेपर से क्यों कराया जाता है? क्या यह EVM पर अविश्वास है? जवाब नहीं, इसकी बड़ी संवैधानिक और तकनीकी वजह है।दरअसल MLC का चुनाव आम चुनावों जैसा नहीं होता। यूपी में इस समय 11 सीटों पर हो रहे MLC चुनाव हों या बिहार में 8 स्नातक-शिक्षक सीटों पर, इनमें वोटर आम जनता नहीं होती। इसमें स्नातक वोटर, शिक्षक वोटर और स्थानीय निकाय के जनप्रतिनिधि (MLA, पार्षद, प्रधान) वोट करते हैं। लोकसभा-विधानसभा में आप एक उम्मीदवार को एक वोट देते हैं, बटन दबाते हैं। लेकिन MLC चुनाव में सिस्टम होता है - Single Transferable Vote यानी एकल संक्रमणीय मत प्रणाली।
मतदाता को बैलेट पेपर पर उम्मीदवार के नाम के सामने अपनी पसंद लिखनी होती है - 1, 2, 3, 4... आपकी पहली पसंद कौन है, दूसरी पसंद कौन है। EVM में यह सुविधा ही नहीं है। EVM सिर्फ एक बटन - एक वोट के लिए बनी है, जबकि MLC में वरीयता क्रम बताना पड़ता है। बिहार MLC चुनाव की गाइडलाइन के मुताबिक इसके लिए बैंगनी रंग के स्केच पेन से ही वोट डालना होता है। अगर आपने टिक-मार्क लगाया, हस्ताक्षर किया, अपनी पेन इस्तेमाल की तो वोट कैंसल हो जाएगा। पहली पसंद के तौर पर '1' लिखना अनिवार्य है। इसमें 50% + 1 वोट का कोटा तय होता है। अगर किसी को पहली पसंद में ही कोटा मिल गया तो वह जीत गया। नहीं मिला तो सबसे कम वोट वाले उम्मीदवार को हटाकर उसके वोट दूसरी पसंद के आधार पर बांट दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया EVM गिन नहीं सकती।
बिल्कुल नहीं। चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट दोनों कह चुके हैं कि EVM सुरक्षित है। MLC में बैलेट का इस्तेमाल उसकी मजबूरी है, न कि EVM पर अविश्वास। यही कारण है कि झारखंड नगर निकाय चुनाव में भी इस बार EVM की उम्र खत्म होने और नई मशीन न मिलने के कारण बैलेट से चुनाव कराना पड़ा, न कि भरोसे की कमी से। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी हाल ही में स्पष्ट कहा कि UP की 11 MLC सीटों - आगरा, मेरठ, लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद-झांसी, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक/स्नातक सीटों पर 23 अक्टूबर को वोटिंग बैलेट पेपर से ही होगी। इसलिए अगली बार जब कोई कहे कि MLC चुनाव बैलेट से क्यों हो रहा है, तो समझ लीजिए - यह चुनाव ही अलग है, इसकी गिनती ही अलग है और इसकी तकनीक EVM में फिट ही नहीं बैठती।




