EVM हटाओ बैलेट लाओ... खड़गे बोले- CEC बीजेपी एजेंट, INDIA ब्लॉक का देशव्यापी प्रोटेस्ट
CEC इस्तीफे से बैलेट पेपर तक खड़गे ने रखीं तीन मांगें - CEC ज्ञानेश कुमार को हटाओ, EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराओ और SIR से पहले वाली वोटर लिस्ट लागू करो। खड़गे ने दावा किया 13 करोड़ वोट काटे गए। INDIA ब्लॉक 8 अक्टूबर तक जिलों में प्रोटेस्ट करेगा।

चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का हल्लाबोल तेज हो गया है। दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक और फिर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर तीन बड़ी मांगें रख दी हैं, जिसके बाद सियासी पारा हाई है। CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा / हटाओ: खड़गे ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने दो अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों के बावजूद SIR से जुड़े 14 फैसले अकेले लिए। खड़गे ने कहा, CEC सरकार की कठपुतली बन गए हैं, उन्हें तत्काल पद से हटाया जाए। इसके लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी भी है।
EVM हटाओ, बैलेट पेपर लाओ: खड़गे ने दूसरी सबसे बड़ी मांग बैलेट पेपर से चुनाव कराने की रखी। उन्होंने कहा कि EVM और VVPAT को लेकर विपक्ष लगातार सवाल पूछ रहा है, लेकिन चुनाव आयोग जवाब नहीं दे रहा। लोकतंत्र बचाना है तो बैलेट पेपर पर लौटना होगा। राहुल गांधी द्वारा महादेवपुरा, हरियाणा और महाराष्ट्र में पेश किए गए सबूतों का भी उन्होंने जिक्र किया। प्री-SIR वोटर लिस्ट लागू करो: तीसरी मांग वोटर लिस्ट को लेकर है। खड़गे का दावा है कि SIR के नाम पर देशभर में 13.3 करोड़ वोटरों के नाम काटे गए हैं। यह वोट चोरी की साजिश है। मांग है कि भविष्य के सभी चुनाव प्री-SIR वाली वोटर लिस्ट से हों, हर बड़े बदलाव का डेटा सार्वजनिक हो और जिसका नाम काटा गया है उसे नोटिस और अपील का मौका मिले।
INDIA ब्लॉक ने ऐलान किया है कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' निकाला जाएगा। 6 अक्टूबर को सभी जिला कलेक्टर और चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन होगा। 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली का भी प्लान है। सीपीआई और सीपीएम पहले ही चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर चुकी हैं। खड़गे ने कहा, "एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य ही गणराज्य की बुनियाद है। इसे कमजोर नहीं होने देंगे। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, मतदाताओं के अधिकार और संविधान बचाने की है।" वहीं चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आयोग का कहना है कि आंतरिक चर्चा में अलग-अलग राय आना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सभी अहम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने कहा है कि विपक्ष संस्थागत विचार-विमर्श को मतभेद के तौर पर पेश कर भ्रम फैला रहा है।





